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रूस की क्रांति के 100 साल: जब सैनिकों ने गोली चलाने से किया इनकार

क्रांति के जरिये रूस में जार के स्वेच्छाचारी शासन का अंत हुआ। इसके बाद रूसी सोवियत संघात्मक समाजवादी गणराज्य (यूएसएसआर) की स्थापना हुई।

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100 Years of Russian Revolution: When the soldiers refused to shoot

Russian Revolution

7 मार्च 1917 को रूस में जनता की हालत बेहद खराब थी। न पहनने को कपड़ा था और न खाने को भोजन। भूखे और ठंड से ठिठुरते गरीब मजदूरों ने 7 मार्च को पेत्रोग्राद की सड़कों पर थे। रोटी की दुकानों पर ताजी और गरम रोटियों का ढेर था, लेकिन उन तक भूखी जनता की पहुंच नहीं थी। भूख से बेहाल कुछ लोगों ने बाजार में लूटपाट शुरू की। सरकार ने सेना को गोली चलाने का आदेश दिया लेकिन सैनिकों ने गोली चलाने से साफ मना कर दिया।

दो हिस्से में हुई क्रांति
क्रांति के जरिये रूस में जार के स्वेच्छाचारी शासन का अंत हुआ। इसके बाद रूसी सोवियत संघात्मक समाजवादी गणराज्य (यूएसएसआर) की स्थापना हुई। यह क्रांति दो हिस्सों में हुई। मार्च 1917 में जनता के विद्रोह के बाद जार को पद छोडऩा पड़ा। इसके बाद एक अस्थायी सरकार बनी। अक्टूबर की क्रांति के बाद अस्थायी सरकार को हटाकर बोल्सेविकों के नेतृत्व में साम्यवादी सरकार की स्थापना की गई।

क्यों हुई रूसी क्रांति
20वीं सदी के पहले दशक में पूंजीवादी व्यवस्था की उदारता का नकाब उतर चुका था।
80 प्रतिशत रूसी जनता कृषि पर निर्भर थी, लेकिन जनता का कृषि पर कोई अधिकार नहीं था।
1861 में एलेक्जेंडर द्वितीय ने भू-दासता प्रथा कानूनी तौर पर खत्म कर दी थी, इसके बाद भी किसानों की हालत नहीं सुधरी थी।
30 किलोग्राम था औसत प्रति व्यक्ति लोह उत्पादन, जो अमरीका में 336 किलो प्रति व्यक्ति था। अन्य क्षेत्रों में भी उत्पादन का यही हाल था।
50 प्रतिशत मजदूर उन कारखानों में कार्यरत थे, जहां मजदूरों की संख्या 500 से अधिक थी।
60 प्रतिशत मजदूर एक कमरे में रहते थे, 1908 में गठित एक आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक।
1905 में रूस-जापान युद्ध के वक्त ही जार निकोलस द्वितीय खो चुका था रूसी जनता का विश्वास
1915 तक आते आते जार की निरंकुशता सारी सीमाएं पार कर चुकी थी। जनता का उत्पीडऩ चरम पर था।
1917 में 1914 के मुकाबले दस गुना ज्यादा रूबल नोट प्रचलन में आ गए थे।

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