
नई दिल्ली। भारत
ने पाकिस्तान की इस्लामाबाद हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2008 के मुम्बई धमाकों के लिए
जिम्मेदार कुख्यात आतंकी जकीउर रहमान लखवी को सबूत के अभाव में जमानत पर रिहा करने
के आदेश पर सख्त रूख अपनाया और विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल
बासित को तलब किया।
भारत ने शुक्रवार को दो टूक कहा कि यह उसकी जिम्मेदारी
है कि पाकिस्तान सारे कानूनी उपाय करके यह सुनिश्चित करे कि लखवी जेल से बाहर नहीं
आने पाए। बासित ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि लखवी को भले ही जमानत मिल गई हो,
लेकिन मुकदमा जारी है। हम सभी मुकदमे को अंजाम तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।
कानून को अपना काम करने दीजिए।
लखवी का मुद्दा राज्यसभा में उठा
लखवी
को जमानत पर रिहा किए जाने का मामला राज्यसभा में कांग्रेस के राजीव शुक्ला और
प्रमोद तिवारी और रजनी पाटिल समेत कई सदस्यों ने शून्यकाल में उठाने की कोशिश की,
लेकिन उपसभापति पी. जे. कुर्रियन ने उन्हें यह अनुमति नहीं दी। कुर्रियन ने उन्हें
यह कहकर मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी कि बिना नोटिस दिए वे अपनी बात नहीं कह
सकते।
यूं चला मामला
इस्लामाबाद हाईकोर्ट जज जस्टिस नूरूल हक ने लखवी को
हिरासत में लिए जाने को अवैध बताते हुए उसकी रिहाई का आदेश दिया। पिछले वर्ष
दिसम्बर में आतंकवाद विरोधी अदालत ने लखवी की जमानत मंजूर कर ली थी और उसकी रिहाई
का आदेश दिया था, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया था।
लखवी के वकील ने ऊपरी अदालत की शरण ली और उधर सरकार ने भी उसे जमानत दिए
जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने 29 दिसम्बर को लखवी की
हिरासत आदेश को स्थगित कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सात जनवरी को लखवी की
नजरबंदी जारी रखने का आदेश दिया था।
Published on:
13 Mar 2015 07:10 pm

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