
abdul sattar edhi
कराची। पाकिस्तान के अलग देश बनने के बाद से वहां बहुत कुछ बदला, लेकिन नहीं बदला तो एक ऐसा पाकिस्तानी जिसने इंसानियत को ही अपना मजहब बना लिया था। जाने-माने समाज सेवी अब्दुल सत्तार ईधी का शुक्रवार रात कराची में निधन हो गया, वह 88 वर्ष के थे। उनका जन्म 1928 में गुजरात के काठियावाड़ में हुआ था। ईधी का परिवार 1947 में बटवारे के बाद कराची में बस गया था।
1951 में अपनी जमा पूंजी से ईधी ने कराची में एक दुकान खोली थी, उसी दुकान में उन्होंने एक डॉक्टर की मदद से डिस्पेंसरी खोली थी। यहीं पर ईधी फाउंडेशन की नींव पड़ी और उसका वजूद पाकिस्तान से होते हुए दुनिया के कई देशों में पहुंच गया। वह गरीबों के लिए ङ्क्षजदा पीर थे। उनके आखिरी शब्द थे मेरे मुल्क के गरीबों का ख्याल रखना। मरते-मरते भी वह अपने एक मात्र सक्रिय अंग आंखों को दान कर गए। वह सबकुछ पहले ही दान कर चुके थे। दो जोड़ी कपड़ों में ही उन्होंने अपना सारा जीवन गुजार दिया।
गिनीज बुक में रिकॉर्ड
साल 1997 में ईधी फाउंडेशन का नाम दुनिया की सबसे बड़ी निजी एंबुलेंस सेवा के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
गीता को भी पाला
पाक में रही मूक बधिर गीता को ईधी ने ही पाला था। पीएम मोदी ने ईधी को एक करोड़ का चेक दिया था, लेकिन ईधी ने वह चेक लौटा दिया था।
इन्होंने किया शर्मसार
पाक के एक न्यूज चैनल के रिपोर्टर ने ईधी मौत की कवरेज के दौरान उनकी कब्र में घुस कर रिपोर्टिंग की, जिसकी जमकर आलोचना हो रही है।
इन अवॉर्ड से सम्मानित
- रमन मैग्सेसे 1986
- लेनिन शांति 1988
- गांधी शांति (भारत) 2007
- युनेस्को रमनजीत सिंह 2009
Published on:
10 Jul 2016 12:43 pm
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