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6 साल बाद पाकिस्तान लौटीं मलाला यूसुफजई, पढ़िए उनके संघर्ष की कहानी

मलाला युसूफजई 6 साल बाद पाकिस्तान लौटी हैं। उनके सम्मान में एक भव्य कार्यक्रम पाकिस्तान में आयोजित किया जा रहा है।

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Video ...Afghanistans `Malala` breshna musazai told her story

Video ...Afghanistans `Malala` breshna musazai told her story

नई दिल्ली: नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसूफजई बुधवार देर रात पाकिस्तान पहुंच गई है। मलाला 6 साल के बाद पाकिस्तान अपने घर लौटी हैं। खुद पर आतंकी हमले के बाद से ही वो पाकिस्तान से बाहर रह रही थीं, लेकिन 6 साल के इंतजार के बाद वो फिर से पाकिस्तान अपने वतन लौटी हैं। 2012 में खुद पर हुए ताबिलान अटैक के बाद से मलाला इंग्लैंड में रह रही थीं। मलाला के पाकिस्तान लौटने के बाद गुरुवार को एक भव्य कार्यक्रम के आयोजन के जरिए पाकिस्तानी सरकार मलाला का स्वागत करेगी।

मलाला के संघर्ष की कहानी

ऐसे में उनके जीवन के संघर्ष की कहानी को हर किसी नागरिक को जानना चाहिए कि आखिर कैसे पाकिस्तान जैसे देश से शांति का संदेश लेकर निकली कोई लड़की आज दुनिया के लिए मिसाल बन चुकी हैं।

- मलाला युसूफजई का जन्म 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हुआ था। मलाला का संघर्ष उस वक्त शुरू हुआ था, जब 2007 से 2009 तक तालिबान ने स्वात घाटी पर कब्जा कर लिया था। तालिबानियों के डर से घाटी के लोगों ने लड़कियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया और 400 से ज्यादा स्कूल बंद हो गए। जिसमें मलाला का स्कूल भी शामिल था। इसके बाद उन्होंने 13 साल की उम्र में लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ना शुरू कर दिया था।

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- जिस उम्र में बच्चे अपने मां-बाप से अपनी मांग पूरी करवाने की जिद करते हैं, उस उम्र में मलाला ने दूसरी लड़कियों के लिए हक लड़ाई शुरु कर दी। इसी दौरान मलाला ने पूरी दुनिया में तहरीक-ए-तालिबान के आतंक के खिलाफ भी आवाज बुलंद की। उन्होंने तालिबान के अत्याचारों को लेकर बीबीसी के लिए एक ब्लॉग लिखा, जिसके बाद वो नायिका बन गईं।

- तहरीक-ए-तालिबान को मलाला युसूफजई का संघर्ष इतना खटका कि उसने 14 साल की उम्र में मलाला को जान से मारने की कोशिश की। अक्टूबर 2012 में तालिबानी आतंकियों ने मलाला के सिर में गोली मारी। इस हमले में मलाला बुरी तरह से घायल हो गईं थीं। इसके बाद से ही वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बन गईं थीं।

- खुद पर हुए इतने बड़े आतंकी हमले के बाद भी मलाला ने संघर्ष की लड़ाई नहीं रोकी और उसके बाद पढ़ने में तेज मलाला ने ने अपने पिता जियाउद्दीन यूसुफजई से दूसरी जगह एडमिशन कराने की गुजारिश की। इसके बाद मलाला ने पिता उसे पेशावर लेकर गए। यहीं मलाला ने सिर्फ 11 साल की उम्र में नेशनल मीडिया के सामने एक मशहूर भाषण दिया जिसका शीर्षक था हाउ डेयर द तालिबान टेक अवे माय बेसिक राइट टू एजुकेशन? इस घटना ने मलाला की जिंदगी बदल कर रख दी।

- आखिर में, 10 दिसंबर 2014 के दिन मलाला को दुनिया के सबसे बड़े पुरस्कार शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नॉर्वे में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रुप से नोबले पुरस्कार प्रदान किया गया। इस तरह मलाला सबसे कम उम्र में नोबेल प्राप्त करने वाली विजेता बन गईं।

- इससे पहले भी मलाला ने शांति के कई पुरस्कारों को अपने नाम किया है। 2013 में संयुक्त राष्ट्र ने मलाला यूसुफजई को मानवाधिकार सम्मान (ह्यूमन राइट अवॉर्ड) देने की घोषणा की। यह सम्मान मानवाधिकार के क्षेत्र में बेहतरीन उपलब्धियों के लिए हर पांच साल में दिया जाता है। मलाला साल 2013 में ही अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार से भी नवाजी जा चुकी हैं।

आखिर में 6 साल बाद पाकिस्तान लौटीं मलाला पर सिर्फ पाकिस्तान को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को उनपर नाज है। पूरी दुनिया मलाला पर गर्व करती है।