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डोकलाम से 150-150 मीटर पीछे हटी दोनों देशों की सेनाएं, भारत ने की पहले पहल

150 मीटर की दूरी बनाने के बाद भी भारत और चीन की सेनाएं मौजूद हैं डोकलाम में और बनाए हुए हैं एक-दूसरे पर नजर

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ashutosh tiwari

Sep 07, 2017

indian soldire

नई दिल्ली: प्रधानमंत्रनरेंद्र मोदी का ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीन का दौरा काफी सफल साबित हुआ है। वैसे तो पीएम मोदी के दौरे से पहले ही भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद को सुलझा लिया गया था, लेकिन डोकलाम में अभी भी दोनों देशों के सैनिक अभी भी तैनात हैं और 300 मीटर की दूरी से एक-दूसरे पर नजर रखे हुए हैं। हालांकि एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि मसले को सुलझाने की प्रक्रिया का पालन करते हुए भारत और चीनी सैनिक पहले की तुलना में करीब 150 मीटर तक पीछे हट गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों की सेनाएं अभी और पीछे हटेंगी।

अभी भी नजरे बनाए हुए हैं सेना के जवान
रिपोर्ट की माने तों डोकलाम में अभी भी दोनों देशों के सैनिकों की मौजूदगी है और वो एक-दूसरे पर नजरे बनाए हुए हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि अगले कुछ हफ्तों में डोकलाम दोनों देशों के सैनिक पीछे हट जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो भारत के लिए चीन पर उसकी ये एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी, क्योंकी डोकलाम विवाद के दौरान चीन कई बार युद्ध की धमकियां दे चुका था, लेकिन भारत का रुख हमेशा डिप्लोमेटिक ही रहा था। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटाने की चर्चा पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात में हुई और फिर ये सहमति बनी कि दोनों देशों के सैनिक 150 मीटर की दूरी बनाएंगे।

सामान के साथ 150 मीटर पीछे हटी सेनाएं
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के जवान अपने टेंट और सड़क बनाने के उपकरणों के साथ डोकलाम से 150-150 मीटर पीछे चले गए हैं। हालांकि ये बात बीते 28 अगस्त को विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में भी कही गई थी। हालांकि इस बयान के बाद भी दोनों देशों ने कथित तौर पर एक-दूसरे पर अपनी सेनाएं पीछे नहीं हटाने के आरोप लगाए थे।

भारत कूटनीतिक रास्ते से चाह रहा था हल
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी के दौरे से पहले ही बीजिंग में कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाया जा रहा था और इसके जरिए कोशिश की जा रही थी कि ब्रिक्स सम्मेलन से पहले ही इस मसले को सुलझा लिया जाए। चीन में भारत की तरफ से राजदूत विजय गोखले प्रतिनिधित्‍व कर रहे थे। बातचीत के दौरान सेना मुख्‍यालय भी शामिल था लेकिन आखिरी प्रस्‍ताव नाथू ला में तैनात ब्रिगेडियर को भेजा गया। उन्‍होंने और उनके चीनी समकक्ष ने तनाव कम करने की प्रक्रिया शुरू करने पर काम किया।

भारत ने की सबसे पहले पहल
दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से तनाव को कम करने की प्रक्रिया में सबसे पहले भारतीय सेना ने की। भारतीय जवान अपने टैंट और बुलडोजर्स के साथ सबसे पहले अपनी सीमा की तरफ लौटे, जो कि भूटान की सीमा के 400 मीटर तक अंदर थे। इसके बाद चीनी सैनिकों ने भी ऐसा ही किया और वे चुंबी घाटी से आगे याटुंग तक लौट गए। बताया जा रहा है कि दोनों देशों ने एक दूसरे की सेनाओं के पीछे हटने की पुष्टि भी की है।

72 दिन तक चला डोकलाम विवाद
आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच भूटान के डोकलाम क्षेत्र को लेकर करीब 2 महीने से ज्यादा ये विवाद चला। इस दौरान दोनों देशों की सेनाएं डोकलाम में युद्ध सामग्री के साथ डेरा डाले हुईं थीं। इस तनाव के दौरान चीन की तरफ से कई बार युद्ध की गीदड़ भभकियां दी गईं थी, लेकिन भारत की तरफ डिप्लोमेटिक अंदाज में ही इस मसले का निपटारा करना जारी रखा और आखिर में भारत की ही कूटनीतिक जीत है जो चीन डोकलाम से अपनी सेना हटाने को तैयार हो गया है।