27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ईशनिंदा मामले में जेल से रिहा होने के बाद पाकिस्तान छोड़ सकती हैं आसिया बीबी

ईसाई महिला आसिया बीबी के वकील ने कहा कि हिंसक प्रदर्शन की वजह से वह पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं है।
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Mangala Prasad Yadav

•

Updated: 1 Nov 2018, 9:34 PM IST

आसिया बीबी

ईशनिंदा मामले में जेल से रिहा होने के बाद पाकिस्तान छोड़ सकती हैं आसिया बीबी

इस्लामाबादः ईशनिंदा के मामले में पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय से बरी की जाने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी के वकील ने गुरुवार को कहा कि उन्हें देश में कट्टर इस्लामिक समूहों के चौतरफा विरोध के बीच अपनी सुरक्षा के लिए पाकिस्तान छोड़ देना चाहिए। सैफ-उल-मलूक ने कहा, "वह पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं है और उन्हें देश छोड़ना होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें भी संभवत: खुद की सुरक्षा के लिए देश छोड़ना पड़ सकता है।"

आसिया बीबी के खिलाफ प्रदर्शन जारी

सर्वोच्च न्यायालय ने ईश निंदा के संबंध में आसिया बीबी की मौत की सजा को रद्द कर दिया था, जिसके बाद ईशनिंदा कानून का समर्थन करने वाले कट्टरपंथी समूहों ने देश में हिंसक प्रदर्शन किया है। कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी तहरीक-ए-लेब्बाइक पाकिस्तान (टीएलपी) ने फैसले को देने वाले न्यायधीशों के मौत की अपील की है। कट्टरपंथी पाकिस्तान में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और लगातार दूसरे दिन भी राजमार्गो को अवरुद्ध कर दिया है।

आसिया बीबी को अभी तक नहीं किया गया रिहा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईसाई महिला के वकील ने कहा कि उन्हें अभी तक मुल्तान जेल से रिहा नहीं किया गया है और इस प्रक्रिया में कई दिन लग सकते हैं। जब मलूक से यह पूछा गया कि किस देश में उनकी मुवक्किल शरण ले सकती है, इस पर उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि वह कहां जाएगी।" दो अंगरक्षकों के होने के बावजूद मलूक ने कहा कि वह खुद अपनी ही जिंदगी को लेकर डरे हुए हैं। उधर, प्रधानमंत्री इमरान खान की चेतावनी के बावजूद लाहौर, करांची और इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में, टीएलपी के सदस्य लगातार राजमार्गो को अवरुद्ध कर रहे हैं। यहां प्रदर्शन की वजह से गुरुवार को पंजाब, सिध और खबर पख्तूनख्वा प्रांतों में शैक्षणिक संस्थान बंद रहे।