
बीजिंग: मालदीव में जारी राजनीतिक संकट पर चीन ने अप्रत्यक्ष रूप से भारत को चेतावनी दी है। चीन ने कहा है कि देश में बाहरी हस्तक्षेप से हालात और जटिल होगी। दरअसल चीन का यह बयान उस वक्त आया है जब मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने देश में गहराते संकट के बीच भारतीय सेना से हस्तक्षेप का आग्रह किया। चीन ने इन आरोपों से भी इनकार किया है कि वह मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का समर्थन कर रहा है। उसने कहा कि बीजिंग दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति का पालन करता है।
मालदीव में मौजूदा स्थिति आंतरिक मामला
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, "मालदीव में मौजूदा स्थिति उसका आंतरिक मामला है। इसे संबंधित पक्षों को बातचीत और आपसी संपर्क से समुचित तरीके से सुलझाना चाहिए। "गेंग ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मालदीव में कार्रवाई करने के बजाए देश की संप्रभुता का सम्मान कर सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। कार्रवाई करने से मौजूदा स्थिति जटिल हो सकती है। "
मालदीव में राजनीतिक संकट जारी
गौरतलब है कि मालदीव की सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच जारी टकराव की वजह से वहां पर गंभीर राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया है। भारत सरकार ने इस मामले में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करने का संकेत दिया है तो चीन ने वहां पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि अगर राष्ट्रपति यामीन ने चीन से दखल देने की अपील की तो वह इस मामले में हस्तक्षेप भी कर सकता है। जबकि पूर्व राष्ट्रपति गयूम और मोहम्मद नासीद भारत से कूटनयिक और सैन्य हस्तक्षेप की अपील कर चुके हैं।
1988 में भारत ने संकट को दूर किया था
बता दूं कि नवंबर, 1988 में मालदीव में उत्पन्न इसी तरह के संकट की स्थिति में भारत ने सैन्य हस्तक्षेप के बल पर संकट का समाधान निकालने में कामयाबी हासिल की थी। इस बार भी सेना को तैयार रहने को कहा गया है। हालांकि इस बात की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। वहां के हालात देखकर भारत एसओपी के तहत पहले ही यात्रा परामर्श जारी कर चुका है।

Published on:
07 Feb 2018 09:58 pm
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