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लिट्टे का बड़ा बयान: राजीव गांधी की हत्या में हमारा नहीं है हाथ, हमारे साथियों को मिले रिहाई

संगठन का दावा है कि इस हत्याकांड से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

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LTTE claims they didn't killed ex Indian PM rajiv gandhi

लिट्टे का बड़ा बयान: राजीव गांधी की हत्या में हमारा नहीं है हाथ, दोषियों को मिले रिहाई

कोलंबो। देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्या के मामले में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल इलम (लिट्टे) से एक बड़ा बयान सामने आया है। हत्या के दोषियों की रिहाई की मांग करते हुए लिट्टे ने कहा है कि उनके संगठन ने राजीव गांधी की हत्या नहीं की थी। संगठन का दावा है कि इस हत्याकांड से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

राजीव गांधी पर हमले की करने के बारे में कभी सोचा भी नहीं

इस चौंकाने वाले बयान के सामने आने के बाद तमिलनाडु की खुफिया एजेंसी ने इस का संज्ञान लिया है। बताया जा रहा है कि इस मामले की जांच शुरू की जा चुकी है। अपने दावे में लिट्टे ने कहा है कि राजीव गांधी की मौत से हमारा कोई लेनादेना नहीं है। लिट्टे की ओर से न तो भारत पर हमला किया गया न ही उसके खिलाफ किसी साजिश की योजना थी। बयान में कहा गया कि राजीव गांधी पर हमले की करने के बारे में कभी सोचा भी नहीं था।

1 दिसंबर 2018 को अपने लेटर पैड पर जारी किया बयान

इससे पहले लिट्टे के पूर्व चीफ प्रभाकरन ने कहा था कि राजीव गांधी की हत्या दुखद थी। बयान में आगे दावा किया गया कि राजीव गांधी का लिट्टे के साथ गोपनीय संबंध था। साथ ही ये भी कहा गया कि श्रीलंका की सरकार ने ही दूसरे देशों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। आपको बता दें कि लिट्टे का ये बयान 1 दिसंबर 2018 को अपने लेटर पैड पर जारी किया है। इस पर संगठन के प्रतिनिधि कुरुबूरन गुरुस्वामी के बकायदा हस्ताक्षर भी हैं।

तमिलनाडु सरकार ने की थी दोषियों के रिहाई की मांग

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तमिलनाडु सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत इस मामले के दोषी सात लोगों की रिहाई की सिफारिश की है। इस कैबिनेट की अगुवाई मुख्यमंत्री इके पलानीस्वामी ने की। कैबिनेट मंत्री जी जयकुमार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक इस सिफारिश को तुरंत राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

बता दें कि इस मामले में सभी सात दोषी साल 1991 से जेल में हैं। इनमें नलिनी श्रीहनर, मुरुगन अका श्रीहरन, जयकुमार, संथन, रॉबर्ट पायस, रविचंद्रन और पेरारीवलन अका अरिवू का नाम शामिल है। दोषियों के रिहाई के लिए राज्य सरकार के सिफारिश के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। पार्टी की ओर से प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कहना है कि आतंकवाद और आतंकवादियों के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति नहीं की जा सकती है।