6 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फेक न्यूज पर नया कानूनः मलेशिया में लगेगा 85 लाख का जुर्माना, 6 साल की सजा

मलेशिया की संसद ने फर्जी खबरों के प्रकाशन पर लगाम के लिए बनाया नया कानून। इस कानून के तहत दोषियों को छह साल तक की सजा होगी।  

2 min read
Google source verification
Fake News

क्वालालंपुर। मीडिया और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के अंबार के बीच मलेशिया की संसद ने एक ऐसा कानून पास किया है जिसमें फर्जी खबर के प्रकाशन पर छह साल तक की सजा हो सकती है। हालांकि आलोचकों ने संसद के इस कानून को विरोध को दबाने वाला कदम करार दिया है। सोमवार को मिली मंजूरी से पहले इस कानून पर गुरुवार को भी चर्चा हुई थी। सत्तारूढ़ बारीसन नेशनल गठबंधन ने इस कानून के पक्ष में मतदान किया है।

ये प्रावधान हैं कानून में
मलेशियाई संसद के इस कानून के दायरे में सिर्फ मलेशियाई ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया को भी शामिल किया गया है। आरंभ में फर्जी खबर छापने पर अधिकतम 10 साल की सजा और पांच लाख रिंगिट यानी करीब 85 लाख रुपए के जुर्माने का प्रस्ताव था। लेकिन बाद में विरोध के चलते सजा की अवधि घटाकर छह साल कर दी गई।

'प्रधानमंत्री पर लगे घोटाले के आरोप को दबाने की कोशिश'
विपक्ष, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रेस की आजादी की वकालत करने वाले संगठन ने भारी जुर्माना और अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करने की आशंका को लेकर कानून की आलोचना की। दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कानून हजारों करोड़ रुपए के उस घोटाले पर बहस को विराम देने की कोशिश है जिसमें प्रधानमंत्री नजीब रजाक भी शामिल हैं। विपक्ष के नेता लिम गुआन एंग ने संसद में कहा कि मौजूदा कानून भी पर्याप्त हैं, फिर और कानूनों की जरूरत क्यों है? उन्होंने इसे तानाशाही की तरफ बढ़ता कदम करार दिया है।

यह है सत्तापक्ष की सफाई
मलेशियाई कानून मंत्री के मुताबिक, 'यह कानून अभिव्यक्ति की आजादी को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि फर्जी खबरों को रोकने के लिए है।' उन्होंने कहा कि फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फर्जी खबरों को मॉनिटर करने में असमर्थ हैं। ऐसे में इस विधेयक से सरकार को नहीं बल्कि कोर्ट को ताकत मिलेगी।