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Russian Oil: रूस ने ‘दोस्त’ भारत के इस फैसले का किया स्वागत, रूसी तेल पर प्राइस कैप का मामला

रूस (Russia) ने कहा है कि वह जी-7 (G7 )और उनके सहयोगियों द्वारा घोषित रूसी तेल पर मूल्य सीमा (Price Cap) का समर्थन नहीं करने के भारत के फैसले का स्वागत करता है। रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक (Alexander Novak) ने रूस में भारत के राजदूत पवन कपूर (Pavan Kapoor) के साथ अपनी बैठक के दौरान बयान दिया।

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Russian Oil: रूस ने 'दोस्त' भारत के इस फैसले का किया स्वागत, रूसी तेल पर प्राइस कैप का मामला

Russia said that it welcomes India's decision to not support the price cap on oil.

ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, जापान, अमेरिका और 27 देशों के यूरोपीय संघ ने रूसी तेल के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल की सीमा तय की थी। यूक्रेन ने पश्चिमी देशों द्वारा रूसी तेल की कीमत और कम करने की मांग की, वहीं रूस ने 60 डॉलर प्रति बैरल की प्राइस कैप को मुक्त और स्थिर बाजार के लिए हानिकारक बताया।

भारत ने नहीं मानी जी-7 की बात
रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में रूसी तेल पर मूल्य सीमा का समर्थन नहीं करने के भारत के फैसले का स्वागत किया, जो 5 दिसंबर को जी 7 देशों और उनके सहयोगियों द्वारा लगाया गया था। रूसी उप प्रधानमंत्री श्री नोवाक ने जोर देकर कहा कि रूस ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति के लिए अपने अनुबंधात्मक दायित्वों को जिम्मेदारी से पूरा कर रहा है, ऊर्जा संकट के बीच पूर्व और दक्षिण में देशों को ऊर्जा निर्यात में विविधता ला रहा है।

युद्ध के बावजूद रूस से तेल आयात जारी
रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, 2022 के पहले आठ महीनों में भारत में रूसी तेल आयात बढ़कर 16.35 मिलियन टन हो गया। विशेष रूप से, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बावजूद भारत रूस से तेल आयात करना जारी रखे हुए है।

तेल उत्पादों और कोयले की डिलीवरी भी बढ़ी
भारत के विदेश मंत्रालय ने रूसी तेल खरीदने के फैसले का बचाव किया है। गर्मियों के दौरान, भारत को तेल लदान के मामले में रूस दूसरे स्थान पर था। इसके अलावा, तेल उत्पादों और कोयले की डिलीवरी भी बढ़ी।

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