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Corona virus: फरवरी के बाद देश में दवाओं की हो सकती है कमी, फिक्की ने चिंता जाहिर की

एंटीबायोटिक और डायबिडिक दवाओं की कमी से गहरायाएगा संकट भारतीय दवा उत्पादकों कि बीच तीन माह तक का कच्चा माल बचा हुआ है
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एंटीबायोटिक

नई दिल्ली। चीन में कोरोना वायरस के कहर को लेकर भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) ने चिंता जाहिर की है। फिक्की का कहना है कोरोना वायरस के कारण देश में चीन से आने वाली जरूरी दवाओं पर असर पड़ेगा। पैरासिटामॉल, आईबूप्रोफेन के साथ अन्य एंटीबायोटिक और डायबिटिक दवाओं की कमी आने वाले माह में देखने को मिल सकती है।

चीन से दवाई का सप्लाई ठप, सिर्फ अप्रैल तक का ही भारत के पास बचा स्टॉक

इसके साथ चीन से आयात होने वाले स्मार्टफोन और सोलर उपकरणों में कमी देखने को मिल सकती है। गौरतलब है कि भारतीय दवा उत्पादकों कि बीच तीन माह तक का कच्चा माल बचा हुआ है। ऐसे में आने वाले समय में भारतीयों को दवा की कमी से जूझना पड़ सकता है। एक अध्ययन के अनुसार मजूदा हालात में इस तरह की परिस्थिति नहीं है। मगर फरवरी के बाद दवा के दाम महेंगे भी हो सकते है।

भारत करीब 70 प्रतिशत दवाओं का आयात चीन से करता है। भारत सरकार का कहना है कि अप्रैल तक उनके पास पर्याप्त मात्रा में ड्रग मौजूद है। मगर इसके बाद परेशानी हो सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार को संकट से उबरने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

गौरतलब है कि चीन में हुबई प्रांत के वुहान शहर में कोरोना वायरस से अब तक 1500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं छह हजार से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। ऐसे में इस क्षेत्र को चीन प्रशासन ने पूरी तरह से सील कर दिया है। अब यहां से आयात और निर्यात पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। भारत सरकार कुछ जरूरी दवाओं की सूची तैयार कर रही है जो हुबई से मंगाई जा रही थीं।