8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

फ्री में कोरोना वैक्सीन लेने के बाद अब श्रीलंका ने भारत को दिया बड़ा झटका, कोलंबो पोर्ट प्रोजक्ट से किया बाहर

HIGHLIGHTS India And Sri Lanka Relation: श्रीलंका की सरकार ने देशभर के ट्रेड यूनियनों के कड़े विरोध के बाद कोलंबो पोर्ट पर बनने वाली ईस्ट कंटेनर टर्मिनल (ECT) परियोजना से बाहर करने का यह फैसला किया है। श्रीलंका सरकार के इस फैसले को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। भारत ने कहा कि यह त्रिपक्षीय समझौता है और श्रीलंका को एकतरफा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Anil Kumar

•

Updated: 3 Feb 2021, 7:28 PM IST

sri_lanka_india.jpg

Sri Lanka Push Out India To Colombo Port Project

कोलंबो। भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए कई देशों को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन ( Corona Vaccine ) उपलब्ध कराया है, जिसमें श्रीलंका भी शामिल है। लेकिन अब चीन के कट्टर समर्थक कहे जाने वाले श्रीलंका ने भारत को एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, चीन के कर्ज के बोझ तले श्रीलंका ने कोलंबो पोर्ट ( Colombo Port ) परियोजना से भारत को बाहर कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका की सरकार ने देशभर के ट्रेड यूनियनों के कड़े विरोध के बाद कोलंबो पोर्ट पर बनने वाली ईस्ट कंटेनर टर्मिनल ( ECT ) परियोजना से बाहर करने का यह फैसला किया है।

China की चालबाजी से Sri Lanka अलर्ट, कहा- Bijing के साथ सौदा करना बड़ी भूल, अब India First Policy पर करेंगे काम

रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब ईस्ट कंटेनर टर्मिनल का संचालन श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी अपने दम पर करेगी। जबकि, बैठक में ये अहम फैसला किया गया कि वेस्ट टर्मिनल को भारत और जापान के साथ मिलकर एक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में विकसित किया जाएगा।

बता दें कि 2019 में भारत और जापान के साथ मिलकर श्रीलंका सरकार ने इस पोर्ट पर कंटेनर टर्मिनल बनाने के लिए समझौता किया था। भारत के इस प्रोजक्ट को हंबनटोटा पोर्ट ( Hambantota Project ) पर चीन की मौजूदगी को एक काट के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, ईसीटी परियोजना को लेकर अभी औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुआ था।

भारत ने जताया एतराज

श्रीलंका सरकार के इस फैसले को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। भारत ने कहा कि यह त्रिपक्षीय समझौता है और श्रीलंका को एकतरफा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो श्रीलंका चीन के दबाव में ऐसा काम कर रहा है, क्योंकि बीजिंग कोलंबों को 50 करोड़ अमरीकी डॉलर का कर्ज दे रहा है।

मालूम हो कि इस परियोजना को लेकर श्रीलंका के श्रमिक लगातार विरोध कर रहे थे और हड़ताल पर थे। इसके बाद प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने खुद दखल देते हुए इस हड़ताल को खत्म करवाया। श्रमिकों की मांग थी कि ईस्ट कंटेनर टर्मिनल (ईसीटी) बनाने के लिए किसी विदेशी देश को मंजूरी न दी जाए।

चीन के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध आगे बढ़ाने पर श्रीलंका का जोर, पीएम महिंदा राजपक्षे ने कहा- हमारा रिश्ता अटूट

मालूम हो कि भारत ने नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत श्रीलंका को कोविशील्ड वैक्सीन की 5 लाख डोज फ्री में दी थी। इसको लेकर राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने भारत और पीएम मोदी का आभार जताया था।