
नई दिल्ली। तिब्बत के एक फिल्ममेकर ने चीन से भागकर अमरीका मे शरण ली है। तिब्बत तथा ओलंपिक्स पर डॉक्युमेंट्री बना चुके 43 वर्षीय ढोंडुप वांगचेन चीन में छह साल की जेल काट चुके हैं। तिब्ब्त पर फिल्म बनाने वाले संगठन ने इस बात की पुष्टी की है कि वे अमरीका के सान फ्रांसिस्को पहुंच गए हैं। वांगचेन के हवाले से कहा गया है कि वे यहां कई सालों बाद आजादी का आनंद ल रहे हैं। साथ ही कहा गया है कि वांगचेन ने हर उस शख्स का धन्यवाद किया है, जिसने उन्हें अपनी पत्नी और बच्चों से मिलने का मौका प्रदान किया। उन्होंने तिब्बत छोड़ने के अपने दर्द का जिक्र भी किया।
वांगचेन को 'लीविंग फियर बिहाइंड' फिल्म बनाने पर 2009 में गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। फिल्म के जरिए ‘विद्रोह भड़काने’ के आरोप में उन्हें सजा सुनाई गई। हालांकि ‘लीविंग फियर बिहाइंड’ को 2012 में अन्तरराष्ट्रीय प्रेस फ्रीडम पुरस्कार से नवाजा गया था।
फिल्म तिब्तियन पर अत्याचारों के बारे में थी। इसमें दरअसल इंटरव्यूस की श्रृंख्ला थी, जिसमें तिब्बती अपने धार्मिक नेता दलाई लामा की प्रशंसा करते हैं। साथ ही यह शिकायत भी करते हैं कि कैसे उनकी संस्कृति को कुचलने का प्रयास किया गया। इंटरव्यूस में लोग बीजिंग ओलंपिक को भी याद करते हैं।
बता दे, वांगचेन की पत्नी और बच्चे अमरीका में ही रह रहे हैं। उन्हें 2012 में अमरीका में राजनीतिक शरण मिली थी। जून 2014 में वांगचेन सजा पूरी करने के बाद किंघाई प्रांत की राजधानी शिनिंग की जेल से बाहर आए। किंतु उनके आने-जाने और संपर्कों पर निगरानी रखी गई। वांगचेन के साथ डाक्यूमेंटरी के मुख्य सहायक बौद्ध भिक्षु गोलोक जिग्मे को भी गिरफ्तार किया गया था। लेकिन दो साल बाद ही वह जेल से भागने में सफल रहे और धर्मशाला पहुंच गए।
एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे इस बारे में कुछ नहीं जानती हैं।
Published on:
28 Dec 2017 09:22 pm
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