6 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेसी की टीशर्ट पहनकर सुर्खियां बटोरने वाले मुर्तजा फंसे मुसीबत मेें, घर छोड़ दर-दर भटकने को हुए मजबूर

गजनी प्रांत के जगहोरी क्षेत्र में रहने वाले मुर्तजा को तालिबान के हमलों के कारण घर छोड़ना पड़ा है

2 min read
Google source verification

image

Mohit Saxena

Dec 07, 2018

football

मेसी की टीशर्ट पहनकर सुर्खियां बटोरने वाले मुर्तजा फंसे मुसीबत मेें, घर छोड़ दर-दर भटकने को हुए मजबूर

काबुल। दो साल पहले मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी लियोन मेसी की टी शर्ट पहनकर सुर्खियों में छाने वाले सात साल के मुर्तजा अहमदी इन दिनों मुसीबत में हैं। गजनी प्रांत के जगहोरी क्षेत्र में रहने वाले मुर्तजा को तालिबान के हमलों के कारण घर छोड़ना पड़ा है। उसका परिवार काबुल में एक किराए के कमरे में पिछले दो हफ्ते रह रहा है।

गौरतलब है कि मुर्तजा 2016 में मेसी की टी शर्ट पहनकर चर्चा का विषय बन गए थे। उसे कतर में एक मैच के दौरान खुद मेसी ने अपने हस्ताक्षर वाली टीशर्ट तोहफे में दी थी। इसके बाद वह दस नंबर वाली टीशर्ट पहनकर फुटबॉल खेलते दिखाई दिए थे। इस दौरान मुर्तजा से जब पूछा गया कि उसकी जर्सी और फुटबाल कहां हैं तो उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे। उसका कहना है कि वह अपना सब कुछ पुराने घर में छोड़ आया। परिवार के सदस्य जल्दबाजी में अपने घर से निकल गए थे। इस दौरान उसकी मां ने उसे टीशर्ट वहीं छोड़ देने को कहा।

घर नहीं जाना चाहता है मुर्तजा का परिवार

मुर्तजा अपने चार भाइयों के साथ काबुल के बेयामान क्षेत्र में एक छोटे से घर में रह रहा है। उसका परिवार बहुत डरा हुआ है। हालांकि गजनी में अफानिस्तान सेना ने आतंकियों को हरा दिया है और वहां पर दोबारा कब्जा जमा लिया है। इसके बावजूद मुर्तजा का परिवार अपने घर नहीं जाना चाहता है। उसका कहना कि वहां दोबारा भी इस तरह की घटना हो सकती है। उसकी मां ने मीडिया को बताया कि जब से मुर्तजा मेसी से मिला है, वह तब से काफी परेशान रही है।

परिवार को लगातार मिल रही थी धमाकी

मेसी से मिलने के बाद मुर्तजा से पूछा जाता था कि उसे कितने पैसे मिले हैं। इस दौरान परिवार को लगातार धमाकी मिलती रहती थी। मां ने बताया कि उन्हें मुर्तजा के अपहरण का खतरा डराता रहा है। इसलिए वह अपने घर वापस नहीं जाना चाहती हैं। गौरतलब है कि करीब 30000 लोग विस्थापितों की जिंदगी जीने पर मजबूर हैं। ये यूनाइटेड नेशंस की मदद पर निर्भर हैं। मुर्तजा का कहना है कि जब वह मेसी से मिला था तब उन्होंने उनसे कहा था कि वह थोड़े बड़े हो जाए तो जल्द उन्हें बुला लेंगे। मगर अभी तक उनका कोई फोन नहीं आया है।