
hafiz saeed
नजरबंदी से रिहाई के बाद से ही मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के संगठन को आतंकी संगठन घोषित किए जाने की मांग उठती रही है। अमरीका भी हाफिस को आतंकी घोषित करने के बारे में कह चुका है। लेकिन लगता है अब अमरीका के इस दबाव का असर पाकिस्तान में दिखने लगा है। हालिया कार्रवाई को इसी रूप में देख जा रहा है।
क्या है मामला?
दरअसल, सईद रिहाई के बाद राजनीतक रूप से सक्रिय होने के लिए पाकिस्तान में राजनीतिक पार्टी बनाकर 2018 में होने वाले आम चुनाव लड़ना चाहता है। हाफिज ने अपनी पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग को राजनीतक पार्टी के रूप में मान्यता देने का आवेदन पाकिस्तान चुनाव आयोग में किया था। लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद आयोग ने इसे राजनितक पार्टी के रूप में मान्यता देने से मना कर दिया। इस पर सईद ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में इसके खिलाफ अपील कर दी। लेकिन पाकिस्तान सरकार नहीं चाहती कि हाफिस ऐसा करे। इसलिए पाकिस्तान की सरकार ने कोर्ट को पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि हाफिस के मामले पर विचार न किया जाए।
पाकि सरकार ने कोर्ट को ये बताया
पाकिस्तान की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- पाकिस्तान के गृहमंत्री ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट को एक पत्र लिखकर हाफिज सईद की याचिका को खारिज करने की मांग की है। इस पत्र में कहा गया है कि सईद की पार्टी प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा की ही शाखा है। सईद के सभी संगठनों पर बैन लगाया जा चुका है। इसलिए मिल्ली मुस्लिम लीग को भी मान्यता नहीं दी जा सकती है।
पाकिस्तान की राजनीति को खतरा
हमंत्री ने अपने पत्र में सईद की पार्टी से पैदा होने वाले खतरों के बारे में भी जिक्र किया है। कहा गया है कि इससे राजनीति में हिंसा और कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा। सईद के अन्य संगठनों के अलावा फलाह-ए-इंसानियत पर भी यूएन बैन लगा चुका है। बता दें, 2008 मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड हाफिज सईद नवंबर में 11 महीनों बाद नजरबंदी से रिहा हुआ था। तभी सईद ने कहा था कि वह अगले साल पाकिस्तान के आम चुनाव लड़ेगा। भारत और अमरीका सईद की रिहाई और राजनीतिक घुसपैठ को लेकर लगातार विरोध करता रहा है।
Published on:
23 Dec 2017 09:44 pm
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