महाभारत में कहा गया है कि जो व्यक्ति अतिथि को जल, भोजन, दीपक और विश्राम स्थान देता है, वह महान पुण्य का भागी बनता है। वहीं, जो अतिथि को निराश कर देता है, उसके जीवन में दुःख और अशांति का वास होता है। यह केवल धार्मिक डर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का संकेत है।