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vastu tips- ऐसा टेरेस गार्डन जो बड़ा सकता है नकारात्मकता

- वास्तु विज्ञान में इन चार दिशाओं के अलावा 4 विदिशाएं भी हैं

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Deepesh Tiwari

Sep 30, 2023

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संस्कृत में कहा गया है कि... गृहस्थस्य क्रियास्सर्वा न सिद्धयन्ति गृहं विना। वास्तु शास्त्र घर, प्रासाद, भवन अथवा मन्दिर निर्माण करने का प्राचीन भारतीय विज्ञान है जिसे वर्तमान समय के विज्ञान आर्किटेक्चर का प्राचीन स्वरुप माना जा सकता है। उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम ये चार मूल दिशाएं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु विज्ञान में इन चार दिशाओं के अलावा 4 विदिशाएं हैं। जिनके आधार पर ही वास्तु की स्थिति निश्चित होती है।

दरअसल वास्तु शास्त्र वास्तुकला का विज्ञानं है। वास्तु शास्त्र हमारे घर, ऑफिस इत्यादि को सही ढंग से बनाने में सहायक होता है। वास्तु शास्त्र भारतीय सभ्यता में सबसे पुरानी प्रथाओं में से एक है। सदियों से, यह लोगों की समृद्ध विरासत में मदद करता रहा है। साथ ही यहां पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के अध्ययन का उपयोग करके अनुशासन विकसित किया है। इसके तहत चुंबकीय बल के साथ गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग करके लोग अपने जीवन से नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करते रहे हैं।

ऐसे में यदि आप भी घर बनवाने जा रहे हैं, तो पूर्व दिशा में आंगन होना चाहिए। वास्तु के अनुसार यह जगह भारी नहीं होनी चाहिए। इस विषय में विज्ञान कहता है यहां ताजी हवा और सूर्य की पर्याप्त रोशनी आना सेहत के दृष्टिकोण से अच्छा होता है।

कलश को भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। ईशान कोण में कलश की स्थापना करें। इससे सकारात्मक विचार आते हैं। नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामनाओं का प्रतीक माना जाता है।
अगर टेरेस गार्डन है, तो साफ-सफाई रखें। मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं देंगे, तो नेगेटिविटी फैलती है। तनाव होता है। कोई भी गार्डन हो, वह साफ-सुथरा हो, तभी मन प्रसन्न होता है।

आग्नेय कोण में एक छोटा बल्ब जला लें। इससे वास्तु दोष दूर रहते हैं। आग्नेय पूर्व और दक्षिण दिशा के मध्य स्थान को कहते हैं।

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कुछ ऐसे सवाल होते हैं, जिनके जवाब अक्सर लोग ज्योतिष में तलाशते हैं। जिन्हें जानने की जिज्ञासा रहती है। ऐसे ही सवालों के जवाब यहां ज्योतिषाचार्य मुकेश भारद्वाज से जानिए...

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