31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश की राजनीति में भूचाल ला सकती है देवगुरु की ये वक्री चाल

- वक्री गुरु का देश दुनिया पर असर

2 min read
Google source verification

image

Deepesh Tiwari

Sep 05, 2023

brahaspati_vakri_sep_2023.png

मेष राशि में 4 सितंबर 2023 की शाम से सौरमंडल का ग्रह गुरु (जुपिटर) वक्री हो गया है। यह गुरु ग्रह (जिसे बृहस्पति भी कहा जाता है) लगभग चार महीने वक्री रहकर 31 दिसंबर 2023 तक विभिन्न राशियों, प्रदेशों-देशों एवं दुनिया को प्रभावित करेगा। साथ ही राज्यों के चुनाव परिणाम सबको चौकाएंगे।

खास बातें
1. भारत का दुनिया में मान बढ़ेगा। जी-20 सम्मलेन में भारत छाया रहेगा। महत्वपूर्ण उपलब्धि (खेल और विज्ञान) मिलेगी।

2. मेष राशि मंगल की राशि है और गुरु ग्रह मंगल का मित्र है। मंगल का संबंध पुलिस, सेना और आग से होता है। अत: गुरु के वक्री होने से पुलिस और सेना को आर्थिक लाभ होगा।

3. प्रदेश, देश-दुनिया में आगजनी की घटनाएं होने की आशंकाएं हैं।

4. राज्यों के चुनावों के परिणाम चौकाने वाले होंगे।

5. मीडिया (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक्स) का प्रभाव बढ़ेगा।

चार्ट-1 परिणाम:
राशियां - परिणाम (प्रभाव)

वृषभ, मिथुन, कर्क, वृश्चिक- श्रेष्ठतम

कन्या, मकर, कुंभ- श्रेष्ठतर

तुला, धनु- श्रेष्ठ

मेष, सिंह, मीन- संतोषप्रद

चार्ट-2 लाभ प्रतिशत
राशियां - लाभ प्रतिशत में - विशेष लाभ

वृषभ, मिथुन - 90% - धन लाभ, विदेश यात्रा, अवार्ड, कर्क, वृश्चिक ऋण मुक्ति, प्रमोशन, सम्मान

कन्या, मकर, कुंभ - 80% - प्रतिष्ठा में वृद्धि, संतान से लाभ, भूमि लाभ, नौकरी

तुला, धनु - 70% - धन लाभ, मान-सम्मान, प्रशंसा

मेष, सिंह, मीन - 55% - सेहत में सुधार, परिश्रम से लाभ

Must read-

वैदिक ज्योतिष: जानें कुंडली में देवगुरु बृहस्पति का प्रभाव

इस संबंध में अजहर हाशमी एस्ट्रोलॉजर व पॉमिस्ट के अनुसार उल्लेखनीय है कि गुरु ग्रह मूलत: शुभ ग्रह है और गोचर में उस पर वक्री शनि ग्रह की तीसरी दृष्टि पड़ रही है, जो गुरु की शुभता को प्रभावित कर रही है। यद्यपि गुरु कभी भी अपनी शुभता नहीं त्यागता, किंतु शनि की तीसरी दृष्टि गुरु की शुभता को प्रभावित अवश्य कर रही है। इसलिए वक्री गुरु के ज्योतिषीय प्रभाव का अध्ययन आवश्यक हो जाता है। गणित के मान और अन्त:करण के अनुमान से प्रभु (ईश्वर) का नाम लेकर वक्री गुरु का ज्योतिषीय प्रभाव चार्ट-1 और लाभ प्रतिशत चार्ट- 2 से दर्शाया जा रहा है। ज्योतिषी भी एक व्यक्ति है और व्यक्ति की सीमाएं होती हैं। प्रभु अनंत है, अत: प्रभु की इच्छा ही सर्वोपरि है।

Story Loader