
guru gochar mesh
Jupiter Transit Aries April 2023: बृहस्पति नवग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह है और हमारे जीवन में विद्या, बुद्धि, अवसर जीवन में प्रत्येक प्रकार की सफलता सुनने सीखने का अवसर, अंतर्ज्ञान, नवीन विचार, भविष्य में खोजने वाले नए समाधान में मदद करने वाला है। वर्तमान में बृहस्पति अपनी स्वयं की राशि यानी मीन राशि में गोचर कर रहा है, अब उसका प्रवेश अपने मित्र मंगल की राशि मेष में होने वाला है, जो कि ऊर्जा की राशि है।
22 अप्रैल को बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करेगा, जो निडरता की राशि भी कही जाती है। इस राशि में बृहस्पति का प्रवेश करना विभिन्न जातकों में जोखिम लेने और हर प्रकार से तैयार करने की क्षमता प्रदान करता है। इस तरह गुरु का मेष राशि में प्रवेश देश और दुनिया पर असर डालेगा, यह असर किस प्रकार का होगा आइए जानते हैं।
बृहस्पति गोचर का भारतवर्ष पर प्रभाव
भारत देश के रूप में 15 अगस्त 1947 मध्य रात्रि को अस्तित्व में आया था यानी भारतवर्ष की कुंडली वृषभ लग्न और कर्क राशि की है। लग्न से गुरु का गोचर बारहवें भाव में हो रहा है, भारतवर्ष की कुंडली में गुरु अर्थव्यवस्था का स्वामी ग्रह माना जाता है, उसका मेष राशि में गोचर देश की अर्थव्यवस्था को मंद कर सकता है।
दुनिया भर में आपदा के संकेत
इसके अलावा क्योंकि गुरु लगभग 12 से 13 महीने तक एक ही राशि में गोचर करता है, जिसके चलते उसका तुला राशि पर दृष्टिपात भारत में घटने वाली अचानक घटनाओं में वृद्धि कर सकता है। इससे देश में भूकंप जैसी बड़ी बड़ी दुर्घटनाएं घट सकती हैं।
अर्थव्यवस्था को कमजोर करने में गुरु की भूमिका रहेगी, परंतु अर्थव्यवस्था इतनी कमजोर नहीं होगी की हालात बिगड़ जाए। इसके पीछे शनि का कुंभ राशि में गोचर भी एक कारण रह सकता है। गुरु ग्रह बुद्धि और ज्ञान का प्रतीक है परंतु गुरु ग्रह एक प्रकार से भारत वर्ष के पड़ोसी देशों से संबंध को भी निर्धारित करता है, जिसके चलते आने वाले दिनों में चीन, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश इत्यादि से भारत के संबंध थोड़े से कमजोर रह सकते हैं, भारत की कुंडली ऐसा इशारा कर रही है।
गुरु का मेष राशि में गोचर से दुनिया पर प्रभाव
गुरु के मेष राशि में गोचर करने के चलते यूरोप की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ेगी, जिसके चलते आर्थिक संकट और गहरा सकता है। वहीं अमेरिका की अर्थव्यवस्था को भी यह कमजोर करेगा। इसके साथ-साथ ईरान, सऊदी अरब, यूएई आदि की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ वहां पर अन्य प्रकार के संकट भी उत्पन्न कर सकता है।
बिगड़ सकते हैं पड़ोसी देशों से रिश्तेः नेपाल और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कमजोर तो करेगा ही साथ-साथ वहां की राजनीतिक परिस्थितियों को भी बिगाड़ेगा, जिसके चलते खासतौर से पाकिस्तान में जो सत्तारूढ़ दल है, वह बेहद कमजोर की स्थिति में आगे बढ़ेगा। आने वाले 13 महीने इमरान खान के लिए बेहद कमजोर साबित होंगे।
Updated on:
18 Apr 2023 05:52 pm
Published on:
18 Apr 2023 05:50 pm

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