तांत्रिक प्रकृति के होते हैं तथा तुरंत प्रभाव दिखाते हैं। इन उपायों को यदि पूरी श्रद्धा के साथ किया जाए तो व्यक्ति के समस्त दुख तुरंत ही नष्ट होकर सौभाग्य का उदय होता है। आइए जानते हैं ऐसे ही लाल किताब के कुछ अचूक उपाय तथा बताई गई सावधानियां:
(1) किसी निकट के मंदिर में जाकर भिखारियों, कुत्ते अथवा अन्य जरूरतमंदों को खाना दान देना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हों तो अपने घर पर ही पक्षियों के लिए पीने के पानी का परिंडा बांधे।
(2) प्रतिदिन कम से कम एक रूपया जनकल्याण के लिए खर्च करें। आप एक गुल्लक बनालें जिसमें रोज का न्यूनतम एक रूपया डाल दें, महीने के आखिर में इस गुल्लक से पैसे निकाल कर किसी जरूरतमंद को दान कर दें।
(3) मद्य (शराब), मांस तथा अनावश्यक हिंसा से दूर रहना चाहिए। विशेष तौर पर जब राहु या शनि की दशा चल रही हो, इनका प्रयोग आदमी को खत्म कर देता है।
(4) घर से निकलते समय भगवान के दर्शन करके जाएं। इससे रास्ते में होने वाले सभी अनिष्ट टल जाते हैं।
(1) प्रतिदिन इस श्लोक का हनुमानजी के सामने बैठ कर कम से कम एक माला जाप करें
“नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।”
(2) महामृत्युंजय मंत्र का नियमित रूप से जाप करें। यदि रोग अपनी अंतिम अवस्था में है तो कोई उम्मीद नहीं बची है तो महामृत्युजंय का सवा लाख जप का अनुष्ठान कराने से राहत मिलती है, परन्तु यह उपाय समय रहते ही होना चाहिए।
(1) घर के आसपास पीपल का वृक्ष नहीं होना चाहिए क्योंकि पीपल पर प्रेतों का वास होता है।
(2) चमेली, गूलर, शीशम, मेहंदी, बबूल, कीकर आदि के वृक्षों पर भी प्रेतों का वास होता है। रात के अंधेरे में इन वृक्षों के नीचे नहीं जाना चाहिए और न ही खुशबुदार पौधों के पास जाना चाहिए।
(3) हाथ से छूटा हुआ या जमीन पर गिरा हुआ भोजन अथवा खाने की कोई भी वस्तु स्वयं ग्रहण न करें।
(4) अग्नि व जल का अपमान न करें। अग्नि तथा जल को कभी न लांघें।
(5) महिलाओं को माहवारी के दिनों में चौराहे के बीच रास्ते में नहीं जाना चाहिए, न हीं उन्हें चमेली जैसे खुशबूदार पेड़ों के पास जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें
(6) किसी निर्जन स्थान, जंगल आदि में मलमूत्र त्याग करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वहां कोई ऐसा वृक्ष तो नहीं है जिस पर प्रेत आदि निवास करते हैं अथवा उस स्थान पर कोई मजार, कब्र या कब्रिस्तान तो नहीं है।