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अगर कुंडली में हैं ये योग तो वैवाहिक जीवन में रहेगा प्यार बेशुमार

love yog in kundali ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में कुछ ऐसे योग और संयोग होते हैं जो वैवाहिक जीवन के लिए बेहद अच्छे होते हैं, इससे यह भी पता चलता है कि शादी सफल होगी या नहीं। आइये जानते हैं कि जीवन में बेशुमार प्यार वाले लव योग क्या हैं और अच्छे वैवाहिक जीवन के योग कौन से हैं..

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Pravin Pandey

Feb 10, 2024

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कुंडली में ये योग रहने पर विवाह के बाद प्रेम रहता है

भारतीय समाज धीरे-धीरे न्यूक्लियर फैमिली की ओर बढ़ रहा है, उसमें भी पति-पत्नी, प्रेमी प्रेमिका के बीच अक्सर तमाम मामलों को लेकर खटास आती रहती है। हालांकि सभी चाहते हैं उसके जीवन का पार्टनर अच्छा हो, उसकी लव स्टोरी हो, जो फिल्मी न हो फिर भी दिलचस्प हो। लेकिन सबकी प्रार्थना यही होती है कि उनका रिश्ता सफल हो, लेकिन झगड़े लव स्टोरी को मुकाम तक नहीं पहुंचने देते। इन सब के पीछे का कारण कुछ ग्रहों की चाल भी हो सकती है तो आइये जानते हैं कुंडली में वे शुभ योग जिनसे पता कर सकते हैं कि रिश्ते में प्रेम की बरसात होगी या नहीं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र ग्रह प्रेम और वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए जिम्मेदार होते हैं। यदि आपकी कुंडली में शुक्र की यह खास स्थिति है तो समझिए आपका वैवाहिक जीवन और प्रेम शानदार रहने वाला है।


ऐसे योग जिनसे वैवाहिक और प्रेम जीवन बनता है अच्छा
1.शुक्र बृहस्पति की युति: ज्योतिष शास्त्र में शुक्र बृहस्पति की युति को शुभ योग माना जाता है क्योंकि यह व्यक्ति के जीवन में प्यार, खुशी और समृद्धि लाने वाले माने जाते हैं। यह युति तब होती है जब कुंडली में शुक्र और बृहस्पति ग्रह एक दूसरे के सामने आ जाते हैं। यह योग विवाह के लिए शुभ होता है। मान्यता है कि यह पार्टनर्स में प्रेम और स्नेह को बढ़ाता है। इससे वैवाहिक जीवन में खुशी, सद्भाव और समझ आती है। यह वित्तीय समृद्धि और भौतिक सफलता भी लाती है।

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2. चंद्रमा मंगल युति: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा मंगल की युति शक्तिशाली योग बनाती है जो किसी व्यक्ति की भावनात्मक और शारीरिक प्रकृति को प्रभावित कर सकता है। यह युति तब होती है जब कुंडली में चंद्रमा और मंगल एक ही भाव में आ जाते हैं। यह युति पार्टनर्स के बीच भावनात्मक और यौन अनुकूलता को बढ़ाती है।


3. पंचम भाव का प्रभाव: कुंडली का पांचवां भाव रोमांस, प्रेम संबंधों और रचनात्मकता से जुड़ा होता है। जब यह घर मजबूत होता है और अनुकूल ग्रह इसमें स्थित होते है तो यह प्रेम जीवन में सौभाग्य और सफलता ला सकता है।


4. सप्तम भाव का प्रभाव: सप्तम भाव साझेदारी और विवाह से जुड़ा होता है। जब यह घर मजबूत होता है और अनुकूल ग्रह इसमें स्थित होते हैं तो यह सद्भाव, स्थिरता और लंबे समय तक चलने वाले रिश्ता बनाता है।

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5. सप्तम भाव में चंद्रमा: सप्तम भाव में चन्द्रमा हो तो वैवाहिक जीवन में प्रेम और सद्भाव रहता है। माना जाता है कि चंद्रमा भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है, और शादी के भाव में इसकी स्थिति पति-पत्नी के बीच भावनात्मक संबंध को बढ़ावा देती है।


6. सप्तम भाव में बृहस्पतिः यदि सप्तम भाव में बृहस्पति ग्रह स्थित हो तो यह वैवाहिक जीवन में सौभाग्य, सुख और समृद्धि लाता है।


7. चतुर्थ भाव में शुक्र: जब चौथे भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो यह सुखी और शांतिपूर्ण गृहस्थ जीवन के लिए एक शुभ योग बनाता है। शुक्र प्रेम और सुंदरता का प्रतिनिधित्व करता है और इसे घरेलू क्षेत्र में प्यार, सद्भाव और खुशी लाने के लिए जाना जाता है।


8. शुभ ग्रहों की अच्छी स्थिति: यदि कुंडली में बृहस्पति, शुक्र या बुध जैसे शुभ ग्रह मजबूत और अच्छी स्थिति में हैं तो पति-पत्नी के बीच प्यार, समझ और अनुकूलता बढ़ाते हैं।