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देवपूजा में दीपक का बड़ा महत्त्व माना गया है। सामान्यतया घी या तेल के दीपक जलाने की परंपरा रही है। पूजा के समय दीपक कैसा हो, उसमें कितनी बत्तियां हो यह जानना बेहद रोचक व जानकारीपरक होता है।
किसी भी देवी या देवता की पूजा में शुद्ध गाय का घी या एक फूल बत्ती या तिल के तेल का दीपक आवश्यक रूप से प्रज्जवलित करने चाहिए। विशेष रूप से भगवती जगदंबा, दुर्गा देवी की आराधना के समय।
दो मुखी घी वाला दीपक माता सरस्वती की आराधना के समय और शिक्षा प्राप्ति के लिए जलाना चाहिए। भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए तीन बत्तियों वाला घी का दीपक जलाएं।
इष्ट सिद्धि, ज्ञान प्राप्ति के लिए गहरा और गोल दीपक प्रयोग में लें। शत्रुनाश, आपत्ति निवारण के लिए मध्य में से ऊपर उठा हुआ दीपक इस्तेमाल करें। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए दीपक सामान्य गहरा होना चाहिए।
हनुमानजी की प्रसन्नता के लिए तिकोने दीपक का प्रयोग करें। दीपक मिट्टी, आटा, तांबा, चांदी, लोहा, पीतल और स्वर्ण धातु के हो सकते हैं लेकिन मूंग, चावल, गेहूं, उड़द और ज्वार को सामान्य भाग में लेकर इसके आटे का दीपक सर्वश्रेष्ठ होता है।
किसी साधना में अखंड जोत जलाने का भी विधान है जिसे गाय के घी और तिल के तेल के साथ भी जलाएं।
Published on:
28 Aug 2016, 12:27 PM IST
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