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बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, एमपी में बदलेंगे ‘बिजली टैरिफ’ के नियम

Electricity tariffs: नया मल्टी ईयर टैरिफ केवल बिजली दरें तय करने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें अगले पांच वर्षों की बिजली मांग, बिजली खरीद लागत व्यापक अध्ययन किया जाएगा।

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Electricity tariffs: उपभोक्ताओं के लिए बनेंगे नए नियम (Photo Source - Patrika)

Electricity tariffs: उपभोक्ताओं के लिए बनेंगे नए नियम (Photo Source - Patrika)

MP Electricity Regulatory Commission: मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने और बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मप्र विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) ने 2027-28 से 2031-32 तक लागू होने वाले नए मल्टी ईयर टैरिफ (एमवाईटी) ढांचे पर काम शुरू कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत बिजली कंपनियों के खर्च, बिजली खरीद, फ्यूल चार्ज, आधारभूत संरचना विकास, नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय भार की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

नए नियमों को 'वितरण विनियम-2026' के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य बिजली क्षेत्र में मौजूद नियामकीय बाधाओं को दूर करना, कंपनियों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ाना और उपभोक्ताओं को न्यायसंगत दरों पर बिजली उपलब्ध कराना है।

मल्टी ईयर टैरिफ के वितरण नियम तय किए जा रहे हैं। बिजली दर व आपूर्ति की स्थिति स्पष्ट करेंगे। नए नियम उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखेंगे। - उमाकांत पांडा, सचिव, एमपीईआरसी

इन प्रमुख बिंदुओं पर बनेगा रोडमैप

फ्यूल चार्ज की तकनीकी जांचः वर्तमान व्यवस्था में बिजली उत्पादन और खरीद की लागत बढ़ने पर कंपनियां हर माह फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट फ्यूल चार्ज के माध्यम से अतिरिक्त राशि उपभोक्ताओं से वसूलती हैं। आयोग अब यह परखेगा कि ईंधन लागत के नाम पर लगाए जाने वाले शुल्क वास्तव में कितने उचित हैं।

पांच वर्षों की जरूरतः नया मल्टी ईयर टैरिफ केवल बिजली दरें तय करने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें अगले पांच वर्षों की बिजली मांग, बिजली खरीद लागत, बिक्री का पूर्वानुमान, नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद, संचालन एवं रखरखाव खर्च, मूल्यह्रास (डिप्रिसिएशन), क्रॉस सब्सिडी अधिभार जैसे विषयों का व्यापक अध्ययन किया जाएगा।

मूल्यह्रास और अनुदान खर्च पर निगरानीः बिजली कंपनियां अपनी परिसंपत्तियों के मूल्यह्रास को भी टैरिफ में शामिल करती हैं। जैसे मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 384 करोड़ की परिसंपत्तियों का मूल्यह्रास दर्ज था, जिसका असर बिजली दरों पर पड़ता है। नए नियमों में ऐसे खर्चों की समीक्षा होगी। वहीं अनुदान की भी समीक्षा होगी।

सोलर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावाः आयोग सौर ऊर्जा को बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। यदि बिजली मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा का अनुपात बढ़ता है तो दीर्घकाल में बिजली उत्पादन लागत नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इससे पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

बिजली कंपनी और उपभोक्ता को ये लाभ

उपभोक्ता को होंगे ये लाभ

-बिजली दर निर्धारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
-फ्यूल चार्ज के नाम लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की बेहतर निगरानी।
-कंपनियों की फिजूलखर्ची कम होने पर बिजली दरों में वृद्धि का दबाव घट सकता है।
-सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने से दीर्घकाल में लागत नियंत्रण की संभावना बनेगी।
-टैरिफ निर्धारण में तकनीकी और वित्तीय तथ्यों का संतुलित उपयोग।

बिजली कंपनी को होंगे ये लाभ

-अगले पांच वर्षों के लिए स्पष्ट वित्तीय और संचालन संबंधी विशेष रोडमैप मिलेगा।
-नवीकरणीय ऊर्जा के समावेशन की बेहतर व सटीक रणनीति विकसित की जा सकेगी।
-वास्तविक लागत और राजस्व आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन संभव होगा।
-नियामकीय अनिश्चितता कम होगी और दीर्घकालिक निर्णय लेना भी आसान होगा।
-अनुदान और पूंजीगत निवेश के उपयोग में स्पष्टता आएगी।