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चाणक्य के इस नीति को अपना कर मोदी ने किया विपक्ष पर पलटवार, जानिए खास बातें

आज पैसों की लालसा इतनी बढ़ गई है कि कोई भी व्यक्ति गलत कार्यों से धन प्राप्त करने लगा है। हर दिन हमारे सामने इसके सबूत देखने को मिल रहे हैं।
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सहारनपुर

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kamlesh sharma

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Updated: 16 Dec 2016, 10:26 PM IST

chanakya niti

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आज पैसों की लालसा इतनी बढ़ गई है कि कोई भी व्यक्ति गलत कार्यों से धन प्राप्त करने लगा है। हर दिन हमारे सामने इसके सबूत देखने को मिल रहे हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि आज के समय में ही इस प्रकार के अवैधानिक कार्य किए जा रहे हैं, प्राचीन काल से ही ऐसे कार्यों से धन कमाने की प्रथा बनी हुई है।

इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने कहा है- अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति। प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति।। इस श्लोक का अर्थ यह है कि अन्याय व गलत कार्यों से कमाया हुआ धन ज्यादा से ज्यादा 10 वर्षों तक ही व्यक्ति के पास रह सकता है। 11वें वर्ष से उस व्यक्ति के धन का विनाश होना शुरू हो जाता है।

इधर, नोटबंदी के बाद पहली बार संसदीय दल को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाषण के दौरान सांसदों को चाणक्य नीति का पाठ पढ़ाया। मोदी ने पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए विपक्ष के रवैये पर तीखे प्रहार भी किए।

बेनामी संपत्ति को लेकर पीएम मोदी ने चाणक्य नीति के श्लोकों का जिक्र करते हुए कहा कि पाप से कमाया हुआ पैसा 10 वर्ष तक रह सकता है। 11वें वर्ष शुरू होते ही वह नष्ट हो जाता है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पहले की सरकार संप्रग के समय घोटाले होते थे और विपक्ष इसका विरोध करता था, लेकिन अभी की सरकार राजग ने कालाधन को समाप्त करने का मिशन आगे बढ़ाया है और विपक्ष इसका विरोध कर रहा है।

कांग्रेस को भ्रष्टाचार के पक्षधर के रूप में पेश करते हुए मोदी ने कहा कि उसने वर्ष 1988 में बेनामी संपत्ति संबंधी कानून बनाया, लेकिन इसके नियमों एवं नियमन को अधिसूचित नहीं किया ताकि इसे प्रभावी बनाया जा सकता। मोदी ने कहा, हमारे लिए देशहित सर्वोपरि है और यह पार्टी हित से उपर है।