
पुखराज रत्न पहनने के फायदे के साथ नुकसान भी जानना जरूरी
Pukhraj Ratn: भारतीय ज्योतिष में पुखराज को देवगुरु बृहस्पति का रत्न माना जाता है। माना जाता है कि यह रत्न बृहस्पति ग्रह के शुभ प्रभावों को बढ़ाकर सकारात्मक फल दिलाता है। ज्योतिष के अनुसार रत्न पहनने वाले को सूट करें तो रंक से राजा बना सकते हैं, लेकिन यदि किसी को शुभ फल न दें तो काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इन रत्नों को पहनने से पहले ज्योतिषियों की सलाह लेना जरूरी है। साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि कौन सा रत्न किस राशि के जातक को और किस परिस्थिति में पहनना फायदेमंद हो सकता है। आइये जानते हैं लखनऊ के ज्योतिषाचार्य पं. उमाशंकर मिश्र से कि पुखराज किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं, साथ ही पुखराज पहनने से क्या लाभ होते हैं।
पुखराज रत्न का फायदा
1. पं. उमाशंकर के अनुसार पुखराज रत्न पहनने से जातक के मान-प्रतिष्ठा और यश में वृद्धि होती है।
2. किसी विद्यार्थी को पढ़ाई में ध्यान देने में दिक्कत आ रही है तो उसे गुरु ग्रह के इस रत्न को पहनने में फायदा हो सकता है। इससे उसे शिक्षा और करियर में सफलता मिलेगी।
3. पुखराज रत्न धारण करने वाले व्यक्ति की रूचि आध्यात्मिक गतिविधियों में बढ़ती है।
4. किसी युवा के विवाह में अड़चन आ रही है तो उस युवा के लिए गुरु बृहस्पति का पीला रत्न पुखराज पहनना लाभदायक हो सकता है।
5. मान्यता है कि पुखराज पहनने से स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी होता है। कहा जाता है कि पुखराज पहनने वाले व्यक्ति को त्वचा विकार, पाचन समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा मानसिक दृढ़ता और रक्त संचरण बेहतर रखने के लिए भी पुखराज पहन सकते हैं।
किसे पहनना चाहिए पुखराज
पं. उमाशंकर के अनुसार मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के जातक इस रत्न को पहन सकते हैं।
किसे नहीं पहनना चाहिए पुखराज
पं. मिश्र के अनुसार पुखराज रत्न को नीलम हीरा, लहसुनियां, पन्ना जैसे अन्य रत्नों के साथ नहीं पहनना चाहिए। यदि कोई ऐसा करता है तो इससे पुखराज रत्न के नकारात्मक प्रभाव उसके जीवन पर पड़ते हैं।
यहां मिलता है पुखराज
यलो सफायर नाम से मशहूर पुखराज जापान, ब्राजील, मैक्सिको, रूस और श्रीलंका में पाया जाता है। इसमें भी बर्मा की खानों से निकला पुखराज सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। यहां मिलने वाला सफेद पुखराज भी प्रसिद्ध है।
पुखराज पहनने के नियम (Pukhraj Pahanane Ka Niyam)
1. पुखराज को सोने की अंगूठी में शुक्ल पक्ष में बृहस्पतिवार को ही पहनना चाहिए।
2. इसके लिए सूर्योदय से पहले उठकर पूजा पाठ करें और अंगूठी को दूध गंगाजल शहद घी शक्कर के घोल में डाल दें।
3. पांच अगरबत्ती गुरु बृहस्पति के लिए जलाएं और ऊँ ब्रह्म बृहस्पतये नमः मंत्र का 108 बार जाप करते हुए अंगूठी को भगवान विष्णु के चरण में रख दें। इसके बाद तर्जनी अंगुली में पहनें।
Updated on:
26 May 2023 10:07 pm
Published on:
26 May 2023 10:04 pm

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