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Raj Yog : कुंडली में इनमें से कोई एक योग बनाता है राजा

rajyog in kundali : कुंडली में राज योग क्या होता है और राजयोग कब बनता है और राज योग का क्या असर होता है, यह सवाल अक्सर दिमाग में आता है, इसका जवाब ज्योतिष शास्त्र में दिया गया है। दरअसल कुंडली के कई योग आपके धनवान समृद्धिशाली और भाग्यवान होने का संकेत देते हैं तो आइये जानते हैं क्या है आपकी कुंडली में राजयोग (rajyog in kundali)..

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Pravin Pandey

Mar 13, 2024

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Raj Yog : कुंडली में इनमें से कोई एक योग बनाता है राजा

Raj Yog : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में नौवें और दसवें स्थान का बड़ा महत्त्व होता है। जन्म कुंडली में नौवां स्थान भाग्य का और दसवां कर्म का होता है। इन दोनों घरों की वजह से ही व्यक्ति को सुख और समृद्धि मिलती है। इस तरह अगर जन्म कुंडली के नौवें या दसवें घर में सही ग्रह मौजूद रहते हैं तो उन परिस्थितियों में राजयोग का निर्माण होता है। ये राज योग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्ति को राजा के समान सुख देता है।


इसके अनुसार जिन व्यक्तियों की कुंडली में राजयोग बनता है, वे बड़े राजनेता, मंत्री, किसी राजनीतिक दल के प्रमुख बनते हैं या कला और व्यवसाय में शिखर पर पहुंचते हैं। इस योग वाला व्यक्ति सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं को पाता है तो आइये जानते हैं राशि अनुसार क्या आपकी कुंडली में राजयोग है (rajyog in kundali) और कौन से राजयोग किस लग्न वालों का जीवन सुखमय बनाते हैं..

मेष लग्न में मंगल और बृहस्पति अगर कुंडली के नौवें या दसवें भाव में विराजमान होते हैं तो यह राजयोग कारक बन जाता है।

वृषभ लग्न में शुक्र और शनि अगर नौवें या दसवें स्थान पर विराजमान होते हैं तो यह राजयोग का निर्माण करते हैं। इस लग्न में शनि राजयोग के लिए अहम कारक है।

मिथुन लग्न में अगर बुध या शनि कुंडली के नौवें या दसवें घर में एक साथ आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक का जीवन राजाओं जैसा बन जाता है।

कर्क लग्न में अगर चंद्रमा और बृहस्पति भाग्य या कर्म के स्थान पर मौजूद होते हैं तो यह केंद्र त्रिकोण राज योग बना देते हैं। इस लग्न वालों के लिए बृहस्पति और चन्द्रमा बेहद शुभ ग्रह होते हैं।

सिंह लग्न के लोगों की कुंडली में अगर सूर्य और मंगल दसवें या भाग्य स्थान में बैठ जाते हैं तो व्यक्ति के जीवन में राज योग का निर्माण हो जाता है।

कन्या लग्न में बुध और शुक्र अगर भाग्य स्थान या दसवें स्थान में एक साथ आ जाते हैं तो जीवन राजाओं जैसा हो जाता है।

तुला लग्न वालों के लिए शुक्र और बुध अगर कुंडली के नौवें या दसवें स्थान पर एक साथ विराजमान हो जाते हैं तो इन ग्रहों का शुभ असर व्यक्ति के लिए राजयोग का निर्माण करता है।

वृश्चिक लग्न में सूर्य और मंगल, भाग्य स्थान या कर्म स्थान (नौवें या दसवें) भाव में एक साथ आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वालों का जीवन राजाओं जैसा हो जाता है। साथ ही अगर मंगल और चंद्रमा भी भाग्य या कर्म स्थान पर आ जाएं तो यह और शुभ रहता है।

धनु लग्न के लोगों की कुंडली में राजयोग के कारक बृहस्पति और सूर्य माने जाते हैं। यह दोनों ग्रह अगर नौवें या दसवें घर में एक साथ बैठ जाएं तो यह राजयोग का निर्माण करते हैं।

मकर लग्न वालों की कुंडली में अगर शनि और बुध की युति, भाग्य या कर्म स्थान पर होती है तो राजयोग बन जाता है।

कुंभ लग्न वालों का अगर शुक्र और शनि नौवें या दसवें स्थान पर एक साथ आ जाते हैं तो जीवन राजाओं जैसा हो जाता है।

मीन लग्न वालों का अगर बृहस्पति और मंगल जन्म कुंडली के नवें या दसवें स्थान पर एक साथ विराजमान हो जाते हैं तो यह राज योग बना देते हैं।