30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां प्रसाद बनाने में कम पड़ गया था घी, फिर नीम करौली बाबा ने किया कुछ ऐसा, जानकर हैरान रह गए लोग

Unleash the Amazing Power of Kainchi Dham Neem Karouli Baba's Miracles: एक तीर्थ स्थल के रूप में मशहूर कैंची धाम में बाबा के चमत्कारों के किस्से, कहानियां आज भी आपको सुनने को मिल जाएंगे। आज पत्रिका.कॉम के इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कैंची धाम का ऐसा ही एक चमत्कारी किस्सा जिसे सुनकर हर कोई रह जाएगा हैरान...

6 min read
Google source verification

image

Sanjana Kumar

May 18, 2023

kainchi_dham_yahan_akar_badal_jati_hai_aapki_kismat.jpg

Unleash the Amazing Power of Kainchi Dham Neem Karouli Baba's Miracles: नीम करौली बाबा के चमत्कार किसी से छिपे नहीं हैं। जहां वे खुद हनुमान जी की भक्ति में रमे रहते थे, वहीं आज उन्हें लोग हनुमान जी का ही अवतार बताते हैं। हनुमान जी की भक्ति ऐसी कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में हनुमान जी के 108 मंदिर बनवाए। माना जाता है कि करौली बाबा का विवाह 11 वर्ष की आयु में ही हो गया था। विवाह के कुछ साल बाद ही उन्होंने घर छोड़ दिया। कहा जाता है कि केवल 17 साल की उम्र में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। हनुमान जी के भक्त नीम करौली बाबा ने 10 सितम्बर 1973 को शरीर त्याग दिया। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन आज देव भूमि उत्तराखंड में नीम करौली बाबा का कैंची धाम दुनिया भर में जाना जाता है। जहां हर साल 15 जून को विशाल मेले का, भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में लाखों की संख्या में बाबा के भक्त कैंची धाम पहुंचते हैं। एक तीर्थ स्थल के रूप में मशहूर कैंची धाम में बाबा के चमत्कारों के किस्से, कहानियां आज भी आपको सुनने को मिल जाएंगे। आज पत्रिका.कॉम के इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कैंची धाम का ऐसा ही एक चमत्कारी किस्सा जिसे सुनकर हर कोई रह जाएगा हैरान...

15 जून को मनाया जाता है मंदिर प्रतिष्ठ का दिवस
उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसा है कैंची धाम। एक ऐसा तीर्थ स्थल जहां साल भर लोग अपने मन की मुरादें मांगने पहुंचते हैं। खासतौर पर 15 जून को। हर साल 15 जून को इस धाम का प्रतिष्ठा दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर यहां एक विशाल मेला लगता है। भंडारे का आयोजन किया जाता है। लोग यहां मेले और भंडारे में आने के बहाने नीम करौली बाबा से अपनी हर परेशानी का हल मांगते हैं, अपनी हर मुराद पूरी होने का आशीर्वाद मांगते हैं। दरअसल मान्यता है कि यहां आने वाला हर इंसान नीम करौली बाबा की कृपा पाता है। उनके आशीर्वाद से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और मन की हर मुराद पूरी होती है।

जानें क्यों प्रसिद्ध है कैंची धाम
नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा/रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कैंची धाम में हनुमान जी, राम-सीता और मां दुर्गा के मंदिर हैं। कैंची धाम बाबा नीम करौली और हनुमान जी की महिमा के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। कैंची धाम का नाम कैंची इसलिए रखा गया है, क्योंकि यहां पर कैंची की तरह 2 तीव्र मोड़ हैं। इन मोड़ों के कारण ही इसका नाम कैची धाम पड़ गया। वहीं नीम करौली धाम की स्थापना को लेकर कई रोचक कथाएं भी आप लोगों के मुंह से सुन सकते हैं।

एप्पल के संस्थापक भी पहुंच चुके हैं यहां
कहा जाता है कि 1962 में नीम करौली बाबा ने उत्तराखंड की इस पवित्र भूमि पर कदम रखा था। यहां उनके चमत्कारों ने लोगों को अपना मुरीद बना लिया था। देश-दुनिया में चर्चित होने के कारण फेसबुक और एप्पल के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स भी कैंची धाम आ चुके हैं। वे यहां दो दिन रुके थे। फेसबुक के मुश्किल के दिनों में मार्क जुकरबर्ग यहां तब आए, जब एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स ने उन्हें यहां आने की सलाह दी। वहीं हॉलीवुड की अभिनेत्री जूलिया राबट्र्स भी नीम करौली बाबा की भक्त रही हैं।

जरूर पढ़ें नीम करौली बाबा का ये चमत्कार
नीम करौली धाम को लेकर कई रोचक कथाएं आपको सुनने को मिलेंगी। उन्हीं में से एक कथा है कैंची धाम के प्रतिष्ठा दिवस पर आयोजित विशाल भंडारे की। माना जाता है कि एक बार 15 जून को कैंची धाम के प्रतिष्ठा दिवस के दिन मेला लगा हुआ था, लोग विशाल भंडारे का आनंद ले रहे थे। इस दौरान भंडारे में बन रहे प्रसाद के लिए घी कम पड़ गया। तब बाबा ने आदेश किया कि कनस्तरों यानी डिब्बो में पास ही बहती नदी का पानी भर लाओ। आयोजकों ने बाबा का आदेश मानते हुए डिब्बों में नदी का पानी भरा और कैंची धाम पहुंचाया। यहां जैसे ही उस पानी का इस्तेमाल प्रसाद बनाने के लिए किया जा रहा था, वैसे ही वह घी में बदल जाता। इस तरह जितने भी लोग उस विशाल भंडारे में आए, कोई वहां से भूखा नहीं गया, सभी ने कैंची धाम के विशाल भंडारे का आनंद लिया।

नीम करौली बाबा के बारे में यहां जानें
- नीम करौली बाबा हमेशा एक कंबल ओढ़े रहते थे।
- नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर में ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
- केवल 11 साल की उम्र में ही उनका विवाह हो चुका था।
- शादी के कुछ समय बाद ही उन्होंने घर छोड़ दिया।
- 17 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान मिला।
- नीम करौली बाबा हनुमान जी के भक्त थे।
- उन्होंने अपने जीवन में 108 हनुमान मंदिर बनवाए।
- बाबा ने अपनी समाधि के लिए वृंदावन की पवित्र भूमि को चुना।
- 10 सितंबर 1973 को उन्होंने शरीर त्याग दिया।
- नीम करौली बाबा को उनके भक्त नीब करौरी बाबा और महाराज जी के नाम से भी पुकारते हैं।
- बाबा का स्पष्ट संदेश था कि सब एक हैं। वह अपने भक्तों से कहते हैं, सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो, भगवान को याद रखो हमेशा सच बोलो।
- कहा जाता है कि उनके पास ऐसी शक्ति थी, जिससे वह एक ही समय पर दो जगह मौजूद रहते थे।

बाबा-नीम करौली के आश्रम और कहां हैं
कैंची धाम के अलावा भी देश के अन्य हिस्सों में बाबा नीम करौली के आश्रम हैं। वृंदावन में बाबा नीम करौली का आश्रम है, जहां उन्होंने देह त्यागी थी। इसके अलावा ऋषिकेश, लखनऊ में बाबा के आश्रम हैं। लेकिन इन गर्मियों में अगर आप नैनीताल, मुक्तेश्वर, रानीखेत, कौसानी जैसी जगह जाने का मन बना रहे हैं, तो एक बार कैंची धाम भी जरूर जाएं और बाबा का आशीर्वाद पाएं।

जानें कैसे पहुंचे यहां
अगर आप भी कैंची धाम जाना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए है, आप सड़क, वायु और रेल तीनों ही साधनों से कैंची धाम पहुंच सकते हैं...

ऐसे तय कर सकते हैं ऐरोप्लेन का सफर
कैंची धाम जाने के लिए आप वायु मार्ग का रास्ता चुन सकते हैं। अगर आप कैंची धाम से काफी दूर रहते हैं। तो आपके लिए वायु मार्ग एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जब आप विदेश में होते हैं, तब भी वायु मार्ग आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। वायु मार्ग से कैंची धाम पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले अपने नजदीकी एयरपोर्ट से पंतनगर एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट लेनी होगी। पंतनगर एयरपोर्ट से कैंची धाम की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। लेकिन अगर आप विदेश से कैंची धाम आना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले फ्लाइट से नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचना होगा। उसके बाद आपको नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पंतनगर एयरपोर्ट के लिए हवाई टिकट लेनी होगी। दरअसल विदेश से कोई भी डायरेक्ट पंतनगर एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट नहीं है। लेकिन अगर आप भारत में ही रहते हैं, तो अपने नजदीकी एयरपोर्ट से सीधा पंतनगर एयरपोर्ट डायरेक्ट फ्लाइट से जा सकते हैं। पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद आप वहां से बस या टैक्सी के माध्यम से कैंची धाम जा सकते हैं।

ट्रेन का सफर भी रहेगा कूल
जब आप भारत में हैं, कैंची धाम पहुंचने के लिए ट्रेन का सफल भी कर सकते हैं। कैंची धाम का नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन है। यह कैंची धाम से लगभग 43 किलोमीटर दूर है। यहां आने के लिए आपको अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन से काठगोदाम रेलवे स्टेशन के लिए टिकट लेना होगा। उसके बाद आप काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर उतरें और यहां से बस या टैक्सी के माध्यम से सीधे कैंची धाम पहुंचें। दरअसल कैंची धाम का नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन है। यहां से कैंची धाम की दूरी लगभग 43 किलोमीटर है। यहां से आप कैची धाम के लिए बस, टैक्सी की सुविधा आसानी से मिल जाती है।

सड़क मार्ग भी है आसान
कैंची धाम नैनीताल से लगभग 17 किलोमीटर दूर है। साथ ही भवाली से कैंची धाम की कुल दूरी लगभग 9 किलोमीटर है। इसलिए अगर आप कैंची धाम सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं, तो यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके लिए आपको अपने नजदीकी स्थान से बस अथवा गाड़ी से नैनीताल अलमोड़ा मार्ग पर जाना होगा। नैनीताल से कैंची धाम की दूरी 17 किलोमीटर है

कैंची धाम में रुकने की व्यवस्था कैसे करें
अगर आप बाबा नीम करौली के कैंची धाम आश्रम जाना चाहते हैं और यहां ठहरना चाहते हैं तो, इसके लिए आपको किसी पुराने श्रद्धालु से रेफरेंस नोट लेकर, अपनी ताजा फोटो के साथ कैंची आश्रम मैनेजर को kainchidhamgmail.com मेल कर सकते हैं। आम तौर पर श्रद्धालुओं को यहां सिर्फ तीन रात रुकने की मंजूरी दी जाती है। यहां रुकने वाले यात्रियों को सुबह और शाम की आरती में शामिल होना जरूरी है।

Story Loader