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Vat Purnima 2023: चार जून को फिर रखा जाएगा वट सावित्री व्रत, यह है वजह

अभी 19 मई को ही ज्येष्ठ अमावस्या के दिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखा था, अब पंद्रह दिन बाद ही फिर वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। इस दिन के व्रत को वट पूर्णिमा व्रत भी कहते हैं। यहां जानिए इसके पीछे की वजह..

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Pravin Pandey

May 23, 2023

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वट पूर्णिमा व्रत बुधवार 4 जून 2023 को

दोबारा वट सावित्री व्रत की वजह
दरअसल, धार्मिक ग्रंथ निर्णयामृत में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखने का विधान बताया गया है। इसके अनुसार अभी हाल में ही यूपी, एमपी, बिहार, दिल्ली आदि राज्यों में वट सावित्री व्रत रखा गया था। जबकि स्कंद पुराण में वट सावित्री व्रत रखने की तिथि ज्येष्ठ पूर्णिमा बताई गई है। यह ज्येष्ठ पूर्णिमा चार जून को मनाई जाएगी। गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों में महिलाएं इसी दिन वट सावित्री व्रत रखती हैं। हालांकि पूजा विधान वगैरह में कोई अंतर नहीं है।


इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र, सुख शांति और पुत्र कामना के लिए व्रत रखेंगी। इस दिन वट वृक्ष की पूजा का भी विशेष कारण है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वट वृक्ष में, भगवान ब्रह्मा, भगवान शिव और विष्णु का वास होता है। इस कारण महिलाएं इस दिन वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष में सूत लपेटते हुए 108 परिक्रमा करती हैं।

Jyeshtha Purnima 2023: चार जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा


पूर्णिमा तिथि की शुरुआतः तीन जून को 11.16 एएम
पूर्णिमा तिथि का समापनः चार जून 9.11 एएम


सिद्धि योगः चार जून 11.59 एएम तक
अभिजित मुहूर्तः 12.10 पीएम से 1.03 पीएम तक
अमृतकालः 7.12 पीएम से 8.41 पीएम तक

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इस वजह से रखा जाता है वट पूर्णिमा व्रत
प्राचीन कथा के अनुसार देवी सावित्री के पति सत्यवान अल्पायु थी। धरती पर उनकी उम्र पूरी होने के बाद जब यमराज उनके प्राण को ले जाने लगे तो सावित्री पीछे-पीछे चल दीं। यमराज ने उन्हें बहुत समझाया कि वो साथ नहीं आ सकतीं, लेकिन सावित्री अपनी जिद पर अड़ी रहीं।


इस पर यमराज ने उन्हें तीन वरदान मांगने के लिए कहा, आखिरी वरदान में उन्होंने सौ पुत्रों की मांग कर दी और यमराज ने यह वरदान दे दिया। इस पर सावित्री बोलीं-बिना पति के पुत्र कैसे होंगे। इस पर प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए। इस दिन ज्येष्ठ अमावस्या तिथि थी। इसलिए इस दिन यह व्रत रखा जाने लगा। हालांकि स्कंद पुराण में यह समय ज्येष्ठ पूर्णिमा बताया गया है। इसलिए दोनों तिथियों पर महिलाएं व्रत रखती हैं।