औरैया में पानी गर्म करने वाली रॉड छूने से युवती बेहोस होकर गिर गई। घर वाले सीएचसी ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जो तस्वीर सामने आई वह दिल दहलाने वाली थी।
बाबूराम मोहनलाल महाविद्यालय के पास नवीन बस्ती पश्चिम में प्रबल प्रताप सिंह परिवार के साथ रहते हैं। उनकी 20 साल की बेटी अंजलि नहाने के लिए पानी गर्म करने के लिए कमरे में गई। बॉल्टी में पानी गर्म करने के लिए रॉड डाल रखी थी। इसी दौरान अंजलि करंट की चपेट में आ गई। घर वालों ने जब बॉल्टी के पास अंजलि को पड़ा देखा तो उसे लेकर बिधनू में सीएचसी सीएचसी पहुंचे।
युवक ने बहन की लाश को पीठ पर बांधा
सीएचसी के डॉक्टरों ने अंजलि को मृत घोषित कर दिया। घर वालों ने बिना पोस्टमार्टम के शव को घर ले जाने की बात कहकर बाहर निकले। अंजलि के भाई आयुष, पिता प्रबल और दूसरी बहन बाइक पर थे। आयुष बाइक पर बैठठा दूसरी बहन पीछे बैठ गई। बीच में पिता ने अंजलि की लाश रखी। इसके बाद दुपट्टे से अंजलि की लाश को भाई ने दुपट्टे से पीठ पर बांध लिया। लगभग 15 से 20 मिनट तक सीएचसी परिसर में ये सब चलता रहा।
सीएचसी अधीक्षक ने जानकारी होने से किया इनकार
इस बारे में सीएचसी अधीक्षक ने मीडिया को बताया कि लाश ले जाने के लिए वाहन मांगते तो जरूर जादिया जाता। अगर कोई गाड़ी नहीं होती तो वाहन 100 शैया अस्पताल से मंगाकर लाश को घर भेजा जाता। बाइक पर लाश ले जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा मामला है तो जानकारी करेंगे।
इससे स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़ा होता है। लाश को घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिले में सिर्फ दो शव वाहन है। एक मेडिकल कॉलेज में रहता है और दूसरा 50 बेड के अस्पताल में है। वहां से वाहन को आने में कम से कम पौने दो घंटे का समय लगता है।