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मिल्कीपुर उपचुनाव में वोटिंग के दौरान हुआ बवाल, अखिलेश यादव का फूटा गुस्सा, जानिए क्या है मामला

Milkipur by-election 2025: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान वोटर आईडी चेक करने को लेकर विवाद छिड़ गया है। अखिलेश यादव ने पुलिस अधिकारियों पर मतदाताओं में डर पैदा करने का आरोप लगाया।

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मिल्कीपुर उपचुनाव में वोटिंग के दौरान हुआ बवाल, अखिलेश यादव का फूटा गुस्सा, जानिए क्या है मामला

मिल्कीपुर उपचुनाव में वोटिंग के दौरान हुआ बवाल, अखिलेश यादव का फूटा गुस्सा, जानिए क्या है मामला

Milkipur Upchunav 2025: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है, लेकिन वोटिंग के दौरान मतदान केंद्रों पर वोटर आईडी को लेकर बवाल हो गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर वोटर आईडी चेक करते पुलिस अधिकारी की एक तस्वीर पोस्ट की है। उन्होंने लिखा, "आईडी चेक करके अफसर मतदाताओं में डर पैदा कर रहे हैं। यह अपराध है। ऐसे लोगों को तुरंत हटाया जाए।" वहीं, सपा प्रत्याशी अजीत प्रसाद भी घाटमपुर के एक मतदान केंद्र पहुंचे और भाजपा के एजेंट पर फर्जी वोट डलवाने का आरोप लगाया है। मुद्दे को लेकर जमकर बवाल हो रहा है ऐसे में सवाल उठता है की आखिर वोटर आईडी कौन चेक कर सकता है? इसे लेकर चुनाव आयोग के क्या नियम हैं?

वोटर आईडी को लेकर चुनाव आयोग का नियम

चुनाव आयोग के नियम के अनुसार मतदान के दिन वोट डालने से पहले हर मतदाता का वेरिफिकेशन करना होता है। चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त निर्वाचन अधिकारी वोटर आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज जांच सकता है। यानी वोटर आईडी और अन्य पहचान पत्र की जांच केवल निर्वाचन अधिकारी या बूथ पर मौजूद पीठासीन अधिकारी कर सकता है। अगर निर्वाचन अधिकारी को कुछ संदिग्ध लगता है तो पुलिस या ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मी आईडी की जांच कर सकता है।

पुलिसकर्मी को नहीं है चेक करने का अधिकार

निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार पुलिसकर्मी या सुरक्षाकर्मियों का काम मतदान को शांतिपूर्वक करना और व्यवस्था बनाए रखना है। वे वोटर आईडी चेक नहीं कर सकते हैं। आईडी चेक करने के संपूर्ण अधिकार पोलिंग पार्टी के पास होते हैं।

बूथ के पोलिंग एजेंट की क्या भूमिका?

मतदान बूथ पर मौजूद पोलिंग एजेंट के पास हर मतदाता की सूची होती है। वे केवल आईडी से सूची का मिलान कर सकते हैं लेकिन आईडी चेक करने का अधिकारी उनके पास भी नहीं होता है। हां, संदेह होने पर वे निर्वाचन अधिकारी के सामने आपत्ति जता सकते हैं। उनकी शिकायत पर पोलिंग पार्टी ही मतदाता की आईडी चेक कर सकती है।