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अयोध्या में अद्भुत कामधेनु गाय बिना गर्भवती हुए देती थी दूध

कामधेनु गाय के निधन पर ग्रामीणों में जन्मदिन पर बनाया समाधि स्थल, मूर्ति की भी हुआ स्थापना

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अयोध्या में अद्भुत कामधेनु गाय बिना गर्भवती हुए देती थी दूध

अयोध्या में अद्भुत कामधेनु गाय बिना गर्भवती हुए देती थी दूध

अयोध्या में एक अद्भुत गाय जो बिना गर्भवती हुए ही दूध देती थी। और लगभग 10 लीटर दूध को रोज गाँव के अलग-अलग घर में भेजा जाता था। जिसे पूरा गांव कामधेनु गाय मानते थे। लेकिन कुछ दिन पूर्व इस गाय के मरने के बाद गांव के लोगो ने गाय की समाधि स्थल भी बना दिया। और प्रतिदिन गांव का एक व्यक्ति इस स्थान धर्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।

13 वर्ष तक दूध देती रही कामधेनु गाय

दरअसल अयोध्या से 10 किलोमीटर दूर प्रभात नगर के ग्राम शुकुलपुर पोस्ट के रहने वाले इंजीनियर मानेंन्द्र शुक्ला के घर 13 दिसंबर 2005 को एक गाय ने जन्म हुआ था।जिसका नाम मोगली कामधेनु रखा गया था। घर परिवार के साथ बहुत सीमित आहार लेने वाली गाय जुलाई 2009 से गर्भधारण किए बिना ही दूध दे रही थीं। जो कि क्षेत्रवासियों में चर्चा का विषय बनी। गांव के लोग इस गाय का दर्शन करने पहुंचने लगे। इस दूध प्रसाद के रूप में लोग पीते थे।

कामधेनु के जन्मदिन पर बनी समाधि स्थल

गांव में इस गाय के आने से खुशी का माहौल था। लेकिन मोगली कामधेनु का 28 अगस्त 2022 में निधन हो गया। तो पूरा गांव शोक चला गया है। जिसको लेकर मोगली कामधेनु जन्मदिन के अवसर पर गांव के लोगो ने समाधि स्थल व मूर्ति की स्थापना कर दी। गांव के लोगो की माने तो आज से रोज इस स्थल पर धर्मिक आयोजन किये जाएंगे।

दूर दूर से गाय के दर्शन करने पहुंच रहे थे लोग

क्षेत्र वासियों का कहना है कि गांव में यदि भागवत रामायण जैसे कार्यक्रम होते थे तो आंख बंद कर पूरी निष्ठा से भागवत का पाठ सुनती थी।परिवार के सदस्यों और गांव वालों ने मिलकर आज मोगली के जन्मदिवस पर गांव में है। समाधि स्थल व मूर्ति की स्थापना की। वही भावुक होते हुए इंजीनियर मानेंन्द्र शुक्ल ने बताया कि हमारी मोगली कामधेनु गाय से कम नहीं थी पूरे गांव के लिए खिलौने की समान थी आने जाने वाले लोग बिना उनका दर्शन किए नहीं जाते थे। धर्मेंद्र पाठक ने बताया कि आने वाले समय में आज के दिन मोगली का निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय रही मोगली का आशीर्वाद लेने दूर-दूर से भी लोग आते थे।