
Ayodhya Election
Ayodhya Election: अयोध्या फैजाबादियों ने साल 1957 से बनाई अपनी परंपरा इस बार भी टूटने नहीं दी। लाख कोशिश के बावजूद भाजपा के लल्लू सिंह हैट्रिक लगाने से चूक गए। एक और रिकॉर्ड इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। इसे तोड़ने के लिए अब जिले के लोगों को एक दशक और इंतजार करना होगा। हालांकि, इसके पहले भी दो और सांसद इस स्वर्णिम अवसर को भुनाने से चूके हैं।
फैजाबाद उन सीटों से बिल्कुल है, जहां के लोग लगातार एक ही प्रतिनिधि चुनने के आदी हैं। यहां के लोग एक बार तो मनमुटाव होने पर मौका दे देते हैं, लेकिन दोबारा मानकों पर खरा न उतरने वालों से सहज ही किनारा कर लेते हैं। पूरे चुनाव भर इसका अहसास भी नहीं होने देते। सीधे परिणाम देते हैं।
साल 1957 से जिले में हुए लोकसभा चुनावों में यह तस्वीर यहां के लोग समय-समय पर जीवंत करते रहे हैं। जिले में पहला लोकसभा चुनाव पूर्ण रूप से साल 1957 में हुआ था और राजाराम मिश्रा पहली बार सांसद बने थे। 1962 में बृजवासी लाल सांसद बने 1967 और 1971 में कांग्रेस के आरके सिन्हा लगातार दो बार सांसद बने।
1977 में वह बीएलडी के अनंतराम जायसवाल से बुरी तरह हार गए और हैट्रिक से चूके गए। इसके बाद हैट्रिक के इस संयोग तक पहुंचने में लगभग 19 सालों तक इंतजार करना पड़ा। साल 1991 और 1996 में भाजपा के विनय कटियार लगातार दो बार सांसद बने, लेकिन 1998 में वह सपा के मित्रसेन से हार गए।
लगभग 26 साल बाद इस बार फिर हैट्रिक का अनूठा संयोग बना। राम मंदिर निर्माण के साथ भाजपा पूरे जोश में थी और हैट्रिक को लेकर सभी आश्वस्त थे, लेकिन फैजावादियों ने इस बार भी अपनी परंपरा कायम रखी। लल्लू सिंह को कांटे की टक्कर में हार का सामना करना पड़ा। सपा के अवधेश प्रसाद चुनाव जीतकर पहली बार सांसद तो बने हैं, लेकिन अब हैट्रिक के इस संयोग तक पहुंचने के लिए फिर से लंबा इंतजार करना होगा।
Published on:
05 Jun 2024 10:38 am
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