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बैंग्लोर के तर्ज पर सँवारे जाएंगे अयोध्या के 108 कुंड

अयोध्या के पौराणिक कुंडों को अस्तित्व में लाने के लिए बनाई गई योजना, देश में लेट मैन ऑफ इंडिया की उपाधि धारक आनंद मल्लिगवद करेंगे मॉनिटरिंग

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बैंग्लोर के तर्ज पर सँवारे जाएंगे अयोध्या के 108 कुंड

बैंग्लोर के तर्ज पर सँवारे जाएंगे अयोध्या के 108 कुंड

अयोध्या. राम नगरी अयोध्या 108 पौराणिक कुंडों को अब अस्तित्व में लाने का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। इन कुंडों को प्राकृतिक तरीके से जीर्णोद्धार कर जल स्रोतों से पुनर्जीवित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा इस योजना को तैयार किया गया है। एडीए के मुताबिक इस परियोजना को लेट मैन ऑफ इंडिया आनंद मल्लिगवद के निर्देशन में प्राकृतिक ढंग से पूर्ण किया जाएगा। इसमें किसी भी प्रकार से सिविल निर्माण का कोई कार्य शामिल नही है।

प्राकृतिक रूप से भी संवारेंगे कुंडों का अस्तित्व

बैंग्लोर के तालाबों व कुंडों को संवारे जाने पर लेट मैन ऑफ इंडिया उपाधि से सम्मानित आनंद मल्लिगवद के सहयोग से अब अयोध्या के कुंडों को संवारा जाएगा जिसको लेकर बनाई गई योजना के प्रेजेंटेशन में हजारों वर्षों से संरक्षित प्राकृतिक सम्पदा के पूरी पद्धति को प्वाइंट जरिए प्रदर्शित किया गया है। वहीं योजना में न्यूनतम लागत में होने वाले इस कार्य को लेकर लेट मैन आनंद का दावा है कि यदि इस परियोजना के साथ कम्युनिटी को जागरुक कर जोड़ा जाए तो दोबारा यह सभी प्राकृतिक तालाब पुनः सैकड़ों वर्षो तक संरक्षित रहेंगे। अयोध्या किस परियोजना के प्रेजेंटेशन को देखने के बाद सैद्धान्तिक रूप से मंजूरी उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव के द्वारा दी गई है। स्काई योजना की पुष्टि करते हुए अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी के उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने इस कार्य को अयोध्या नगर स्थित लाल डिग्गी तालाब से शुरू करने की जानकारी दी है।

अयोध्या के लाल डिग्गी तालाब से शुरू हुआ सौंदर्यीकरण का कार्य

लेक मैन ऑफ इंडिया के निदेशन में अयोध्या नगर स्थित लाल डिग्गी तालाब का कार्य प्रारंभ से पहले पहले तालाब को सुखाने के लिए उसमें पानी को बाहर निकाला जा रहा है। लेट मैन आनंद के मुताबिक तालाब बायोरेमडेशन के काम पर रोक लगा दिया गया है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि नदी पहाड़ों से निकलकर अपना रास्ता बनाते हुए अपना सफर तय करती हैं और हजारों साल तक इन नदियों का जल पूरी तरह सृष्टि का पोषण करता रहा है। लेकिन जब मानवीय मैकेनिज्म का कार्य प्रारंभ हुआ तब से नदियों का जल प्रवाह बाधित करते हुए रासायनिक प्रयोग बढ़ गया तो प्रदूषण का सिलसिला भी तेज हो गया है। वही बताया कि यही हाल रहा तो कुआं व तालाबों के साथ नदियों का अस्तित्व भी दांव पर लग गया है।