Ayodhya: रामनगरी के एक ऐसे दानवीर युवक की कहानी , जो प्रसिद्धि से दूर रहकर भूखे नवजात बच्चों व बीमारों को मुफ्त दूध उपलब्ध करा रहा है।
Ayodhya donor story: सीमित संसाधन होने के बावजूद अयोध्या में कुछ ऐसे दानवीर भी हैं जिन्हें ज्यादातर लोग शायद ही जानते हों। उन्हें ना तो प्रसिद्धि की चाह है और ना ही सहयोग की आस। बस जरूरतमंद की मदद करना ही उन्हें सुकून पहुंचाता है। हम आज आपको बताने जा रहे हैं अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर के पास एक छोटी सी दुकान में चाय बेचने वाले सुमित सिंह की कहानी। सुमित एक ऐसे ही दानवीर हैं जो पढ़ाई के साथ चाय की दुकान चला अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे हैं। पत्रिका. कॉम को जब इस युवक के बारे में जानकारी मिली तो उस दुकान पर हम जा पहुंचे और सुमित से बातचीत की। सुमित ने बताया कि अयोध्या में रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इनमें से कई ऐसी महिलाएं भी होती हैं जिनकी गोद में नवजात बच्चे होते हैं और जिन्हें दूध की जरूरत होती है।
सुमित सिंह ने बताया कि कई बार उनकी दुकान पर ऐसी ही महिलाएं बच्चों को पिलाने के लिये दूध खरीदने आ जाती थीं। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि कुछ महिलाओं के पास पैसे की कमी होती थी। बताया कि प्रभु की कृपा से उन्हें बच्चों में भगवान का रूप दिखने लगा और हनुमानजी की प्रेरणा से नवजात बच्चों के लिए उन्होंने मुफ्त दूध उपलब्ध कराने की ठान ली। सुमित के इस नेक कार्य को देखते हुए उनकी दुकान के बगल स्थित एएस मोबाइल सेंटर के प्रोपराइटर अमित गुप्ता ने भी उनका सहयोग शुरू कर दिया। अमित गुप्ता का कहना है कि कई बार उन्होंने नवजात बच्चों को गोद में उठाए दूध के लिए माओं को भटकते हुए देखा था। इसके बाद उनके मन में विचार आया कि क्यों ना ऐसे बच्चों को दूध मुफ्त उपलब्ध करा रहे सुमित का सहयोग किया जाए।
उन्होंने अपनी इच्छा चाय की दुकान करने वाले सुमित सिंह को बताई। सुमित ने इसे सहर्ष स्वीकार करते हुए अधिक से अधिक जरूरतमंद को दूध उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। पत्रिका डॉट कॉम के साथ खास बातचीत में सुमित ने बताया कि अभी दिन में 4-5 बच्चे ही अपने परिजन के साथ उनकी दुकान पर पहुंचते हैं। उनकी इच्छा यह है कि वह अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को दूध उपलब्ध करा सकें। इसके लिए उन्होंने कुछ स्थानों पर इससे संबंधित सूचना भी चस्पा की है। सुमित ने बताया कि जब भी दुकान पर दूध खत्म हो जाता है तो वह तुरंत अन्यत्र से व्यवस्था करते हैं ताकि किसी भी नवजात भूखे बच्चे को वापस न जाना पड़े। उन्होंने बताया कि सिर्फ बच्चों को ही नहीं, यदि किसी भी व्यक्ति को दूध से दवा खाने की आवश्यकता होती है तो भी उसे दूध मुफ्त दिया जाता है। सुमित सिंह ने बताया कि उन्होंने ग्रेजुएशन कंप्लीट कर लिया है और अब एमबीए की पढ़ाई कर रहे हैं।