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गुरु पूर्णिमा पर अयोध्या पहुँचे 5 लाख भक्तों ने निभाई गुरु शिष्य की परंपरा

राम नगरी अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन पूजन, गुरुओं की भी उतारी आरती

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गुरु पूर्णिमा पर अयोध्या पहुँचे 5 लाख भक्तों ने निभाई गुरु शिष्य की परंपरा

गुरु पूर्णिमा पर अयोध्या पहुँचे 5 लाख भक्तों ने निभाई गुरु शिष्य की परंपरा

अयोध्या. गुरु पूर्णिमा के मौके पर लाखों की संख्या में अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने सरयू में स्नान के बाद राम जन्मभूमि हनुमानगढ़ी सहित प्रमुख मंदिरों में पूजन अर्चन किया इसके बाद सभी भक्त अपने गुरुओं की आराधना की। गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म की प्राचीन परंपरा है जिस का निर्वाह आज भी लोग अपने गुरुओं के दर्शन पूजन और सेवा कर करते हैं।

कोरोना काल के बाद भक्तों में बढ़ी आस्था

दो वर्ष से रहे कोरोना काल के भक्त अपने गुरुओं से दूर रहे । लेकिन इस बार कोई भी भक्त इस अवसर को छोड़ना नही चाहता है। यही कारण है कि इस वर्ष गुरु पूर्णिमा उत्सव अयोध्या में बड़े ही धूम धाम से मनाया जा रहा है। लाखों की संख्या में अयोध्या पहुंचे भक्तों ने अपने गुरु का वंदन कर रहे हैं। अयोध्या के प्रमुख पीठ हनुमानगढ़ी, मणिराम दास छावनी, राम बल्लभा कुंज, शियाबल्लभ कुंज, रंग महल, दशरथ महल सहित सैकड़ों मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ है। आज के दिन अपने गुरु की आरती के बाद उन्हें फल, मीठा से भोग लगा रहे हैं।

लाखों की संख्या में सरयू का स्नान कर रहे भक्त

घाट पुरोहित रामाधार पांडे ने कहा कि 2 साल करोना काल में कोई भी भीड़ भाड़ नहीं थी एक बार राम लला की कृपा से सब सही है और अब राम नगरी में श्रद्धालुओं का जमावड़ा है जबसे रामलला के भूमि पूजन हुआ श्रद्धालुओं की अपार भीड़ पहुंच रही है गुरु पूर्णिमा के मौके पर 3:00 बजे सुबह से ही स्नान शुरू हुआ है श्रद्धालु स्नान करने के बाद गोदान कर रहे हैं और नागेश्वरनाथ हनुमानगढ़ी राम जन्म भूमि दर्शन पूजन कर रहे है

लोगों के जीवन में गुरु का है बड़ा महत्व

राम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा के मौके पर व्यास की पूजा और व्यास की तिथि है आज शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं और गुरु से आशीर्वाद लेते हैं आचार्य सत्येंद्र कहते हैं कि जब मंत्र की सृष्टि गुरु शिष्य के हृदय में स्थापित करता है तब उसका स्वरूप ब्रह्मा का होता है पालन पोषण और विस्तार को लेकर जब ज्ञान देता तो गुरु का स्वरूप विष्णु का होता है और जब गुरु सभी शक्ति शिष्य को प्राप्त कराने के लिए इज्जत करता है तो सिर्फ उसका शुरू पारब्रह्म परमेश्वर का हो जाता है आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि धार्मिक मान्यता है कि गुरु की बात मानने वाले शिष्य को उसकी मुक्ति को संशय नहीं रहता आज के दिन गुरु पूर्णिमा है जो गुरु के लिए है लोग आश्रम में जा कर के अपने गुरुओं की पूजा करते हैं गुरु की महत्वता और कृपा आप पूर्ण रुप से शिष्य को मिली और शिष्य का कल्याण हो इसलिए गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।