
अयोध्या. अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। आज (18 अक्टूबर) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या में 137 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री जिन परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे, उनमें कोरियन महारानी हो के स्मारक के सौंदर्यीकरण भी योजना शामिल है। प्रदेश सरकार कोरियन महारानी हो के स्मारक पर बड़ी रकम खर्च कर रही है। तो आइए जानते हैं कि कोरियाई महारानी हो और रामनगरी अयोध्या के बीच क्या कनेक्शन है।
'साम्गुक युसा' नामक पुस्तक में दक्षिण कोरियाई इतिहासकार इर्यान ने कोरिया और अयोध्या के रिश्तों के बारे में लिखा है। इर्यान के मुताबिक, लगभग दो हजार साल पहले अयोध्या की राजकुमारी हो नौकायन के दौरान दक्षिण कोरिया पहुंच गई थीं। उन दिनों कोरिया में 'काया' राजवंश का शासन था और किम सुरो वहां का राजा था, जिससे राजकुमारी हो को प्रेम हो गया और दोनों वैवाहिक बंधन में बंध गए थे।
60 लाख कोरियन हैं अयोध्या की राजकुमारी के वंशज
कोरिया में कारक गोत्र के तकरीबन 60 लाख लोग खुद को राजा सुरो और अयोध्या की राजकुमारी हो का वंशज मनाते हैं। यह संख्या दक्षिण कोरिया की आबादी के 10वें हिस्से से भी अधिक है। इसीलिए दक्षिण कोरिया की बड़ी आबादी आज भी खुद को किम सुरो की 72वीं पीढ़ी बताती है और अयोध्या के मौजूदा राज परिवार को काया राजवंश का हिस्सा मानते हैं और इस राजवंश से जुड़े लोगों का सम्मान भी करते हैं।
अयोध्या को 'अयुता' कहते हैं कोरियन
दक्षिण कोरियन साहित्य में अयोध्या को 'अयुता' के नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं दक्षिण कोरियन सरकार ने अपनी पूर्व रानी की स्मृति में एक स्मारक भी बनवा रखा है। अयोध्या में राजकुमारी हो के स्मारक को देखने के हर साल दक्षिण कोरिया से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। अयोध्या और कोरिया के कनेक्शन का एक बड़ा कारण और भी है। अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के परिवार ने एक दूसरे को चूमती मछलियों का जो राज चिन्ह पीढ़ियों से संभालकर रखा है, वही राज चिन्ह कोरिया के राजा किम सुरो का भी था।
Updated on:
18 Oct 2017 02:24 pm
Published on:
18 Oct 2017 02:21 pm
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