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अयोध्या के राजवंश का रियासत से सियासत तक का सफ़र

किसी जमाने में इस राजवंश के सदस्य अयोध्या नगर की व्यवस्था चलाते थे, लेकिन समय बीतने के साथ ही यह परम्परा समाप्त हो गयी और वर्तमान में राजवंश के सदस्य राजनीति और साहित्य की दुनिया से जुड़ गए हैं।

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Ashish Kumar Pandey

May 05, 2016

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अनूप कुमार
अयोध्या.
भारत में राजा महाराजाओं की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। इतिहास पलट कर देखने से इन राजाओं की वीरता और उनके कौशल पराक्रम के साथ ही उनकी रियासतों और उनके महलों के साथ ही उनके सामजिक योगदान का पता चलता है, लेकिन वक्त बदलने के साथ ही अब बहुत कुछ बदल चुका है और किसी ज़माने में अपनी सल्तनत में हुकूमत करने वाले राजे रजवाड़े अब समाज के अन्य क्षेत्रों में अपनी अहम् भूमिका निभा रहे हैं।


आज़ादी के बाद से ही देश के अलग-अलग प्रान्तों और शहरों में राजे रजवाड़े और रियासतों की सल्तनत ख़त्म हो गयी थी, लेकिन उन रजवाड़ों और उनकी रियासतों के वारिस आज भी हैं और उन्हें आज भी इन शहरों के लोग राजा जैसा ही सम्मान देते हैं। ऐसी ही एक सल्तनत है धार्मिक नगरी अयोध्या में राजवंश परिवार की जिसमें वर्तमान में राजा के रूप में विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र आज भी अयोध्या के लोगों की जुबान पर राजा साहब के रूप में जाने जाते हैं। किसी जमाने में इस राजवंश के सदस्य अयोध्या नगर की व्यवस्था चलाते थे, लेकिन समय बीतने के साथ ही यह परम्परा समाप्त हो गयी और वर्तमान में राजवंश के सदस्य राजनीति और साहित्य की दुनिया से जुड़ गए हैं।


जानिये अयोध्या के राजवंश का संक्षिप्त परिचय
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अयोध्या में राजवंश का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। अयोध्या में स्थित विशाल महल इस राजवंश की गौरवगाथा का प्रतीक है, राजा दर्शन सिंह की वंशावली से जुडी कड़ी में स्वर्गीय महारानी विमला देवी के दो पुत्र विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र और शैलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र हुए, जिसमें विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के बड़े होने के कारण उन्हें इस राजवंश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और उन्हें राजा अयोध्या के रूप में जाना जाने लगा। राज रियासत के खत्म होने के बाद राजवंश के अगुआ विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ने राजनीति की तरफ रुख किया और साल 2009 में उन्होंने फैजाबाद संसदीय सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई, उसके कुछ समय बाद राजा साहब का सियासत से मोहभंग हुआ और उन्होंने बसपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वहीँ राजपरिवार के दूसरे बेटे शैलेन्द्र मोहन मिश्र अयोध्या के साकेत महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं और अयोध्या राजवंश से जुड़ी व्यवस्था को देखते हैं। राजवंश के कुँवर के रूप में राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के बेटे यतीन्द्र मोहन प्रताप मिश्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार होने के साथ-साथ विविध भारती के सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं।


राजमहल को हेरिटेज होटल की शक्ल देकर नयी पहचान देने की कोशिश

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम की नगरी में आध्यात्म के साथ-साथ धार्मिक नगरी की शानो शौकत का प्रतीक अयोध्या राजपरिवार का राजमहल को अब हेरिटेज होटल की शक्ल देने की तैयारी पूरी की जा रही है और इसका खाका तैयार कर लिया गया है। प्रदेश सरकार से इसकी अनुमति भी मिल गयी है। अयोध्या नगर के बीचों बीच स्थित राजसदन के विशाल प्रांगण में अयोध्या के राजपरिवार के सभी सदस्य रहते हैं, लेकिन अयोध्या राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के अनुरोध पर प्रदेश सरकार ने इस राजमहल को एक हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने का रास्ता साफ़ कर दिया है। वहीं राजपरिवार ने भी हेरिटेज होटल के रूप में राजसदन का पंजीकरण करा लिया है।


आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस होगा

दुनिया में धार्मिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध अयोध्या को विश्व के पर्यटन मानचित्र पर उभारने के लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुराने शहरों में स्थित राज महलों की तर्ज पर अयोध्या राजवंश परिवार के राजसदन को हेरिटेज होटल की शक्ल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके लिए निर्माण सम्बन्धी खाका तैयार किया जा रहा है। राजमहल के विशाल परिसर में स्थित सुन्दर भवन और उसमें बने विभिन्न कमरों का रंग रोगन कर उन्हें नर्इ शक्ल दिए जाने की योजना है। वहीं परिसर में मौजूद प्राचीन स्थापत्य कला के नमूनों को भी संरक्षित कर उन्हें पर्यटकों के सामने पेश करने की योजना है।


विदेशी सैलानियों के आने से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
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वैसे तो धार्मिक नगरी अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम की जन्मस्थली के रूप में पूरी दुनिया में जानी जाती है, लेकिन अयोध्या में पर्यटकों के ठहरने की बेहतर व्यवस्था न होने के कारण देश-विदेश से आने वाले पर्यटक बनारस और इलाहबाद तक तो आते हैं पर अयोध्या में रहने का समुचित इंतजाम न होने के चलते अयोध्या आने से कतराते हैं, जिसके चलते अयोध्या में विदशी सैलानियों और पर्यटकों की आमद ना के बराबर है, लेकिन राजसदन परिसर को हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने से उम्मीद जताई जा रही है कि अयोध्या में विदेशी सैलानियों की आमद बढ़ेगी।


राजपरिवार ने पंजीकरण के लिए किया आवेदन सरकार ने दी अनुमति

अयोध्या राजपरिवार के मुखिया विमलेंद्र मोहन मिश्र के मुताबिक़ राजसदन के एक हिस्से को हेरिटेज होटल का रूप दिया जाएगा, जिससे अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और इसके लिए पंजीकरण कराया जा चूका है। इस योजना को धरातल पर लाने के लिए प्रदेश सरकार से अनुमति मिल गयी है और अब इस योजना पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। पहले चरण में इस हेरिटेज होटल में कितने कमरे होंगे और उनका स्वरुप कैसा होगा इसका खाका तैयार किया जा रहा है।


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