अयोध्या में राजवंश का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। अयोध्या में स्थित विशाल महल इस राजवंश की गौरवगाथा का प्रतीक है, राजा दर्शन सिंह की वंशावली से जुडी कड़ी में स्वर्गीय महारानी विमला देवी के दो पुत्र विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र और शैलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र हुए, जिसमें विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के बड़े होने के कारण उन्हें इस राजवंश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और उन्हें राजा अयोध्या के रूप में जाना जाने लगा। राज रियासत के खत्म होने के बाद राजवंश के अगुआ विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ने राजनीति की तरफ रुख किया और साल 2009 में उन्होंने फैजाबाद संसदीय सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई, उसके कुछ समय बाद राजा साहब का सियासत से मोहभंग हुआ और उन्होंने बसपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वहीँ राजपरिवार के दूसरे बेटे शैलेन्द्र मोहन मिश्र अयोध्या के साकेत महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं और अयोध्या राजवंश से जुड़ी व्यवस्था को देखते हैं। राजवंश के कुँवर के रूप में राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के बेटे यतीन्द्र मोहन प्रताप मिश्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार होने के साथ-साथ विविध भारती के सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं।