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मीलों का सफर तय कर अयोध्या पहुंची जुगाड़ गाड़ी

जयपुर से घर वापसी के लिए जुगाड़ गाड़ी बनी पांचों भाइयों की हम सफर

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मीलों का सफर तय कर अयोध्या पहुंची जुगाड़ गाड़ी

मीलों का सफर तय कर अयोध्या पहुंची जुगाड़ गाड़ी

अयोध्या : कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी के साथ फैल रहा है दूरदराज शहरों में फंसे कामदार अपने अपने वतन की वापसी के लिए तरह तरह के उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं कहीं लोग ट्रक को बसों और मोटरसाइकिलों से सफर कर रहे हैं तो बहुत से लोग पैदल और जुगाड़ गाड़ी से ही चल पड़े हैं अपने वतन की वापसी की तरफ कामदार लौट रहे हैं ऐसे में सरकारों के द्वारा किए गए उपाय नाकाफी है लोग लाक डाउन की बंदी की वजह से भूखे और प्यासे हैं रास्ते में समाजसेवी संस्था और संगठन उनके भोजन और पानी की व्यवस्था कर रहे हैं दूरदराज से लोग अपने अपने वतन की वापसी के लिए निकले है देखते ही भोजन और पानी की व्यवस्था पर आवश्यकतानुसार रुक रहे हैं खाना खा रहे हैं और फिर अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहे हैं इसमें प्रमुख रूप से अयोध्या के नेशनल हाईवे के किनारे कई संगठनों ने कामगारों की मदद के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था कर रखी है लेकिन आज एक ऐसा ही नजारा दिखा जिसमे जयपुर से अपनी जुगाड़ गाड़ी से अपने वतन लौट रहे कामदारों का भी दिखा पांच भाइयों का यह कुनबा मधुबनी बिहार के लिए 12 तारीख की शाम को जयपुर से निकला था और अभी अयोध्या पहुंचा है अयोध्या में रुक कर के भोजन किया और और रास्ते में मिली सुविधाओं को भी सराहा एक काम तारों ने उनका कहना है कि भोजन पानी की पर्याप्त व्यवस्था थी कहीं असुविधा नहीं हुई.

जयपुर में रह कर के चार्ट और गन्ने का जूस बेचने का काम करने वाले पीतांबर यादव अपने ही कुनबे के छह लोगों के साथ जयपुर में रहकर के गन्ने का जूस और चाट बेचने का काम करते थे मार्च से ही लॉक डाउन लग गया लगभग 1 साल बाद वह अपने वतन वापस जा रहे हैं लेकिन मुफलिसी ही हाथ लगी है परदेस में बचाए गए पैसों से 2 महीने तक भोजन और दैनिक आवश्यकता पूरी की मगर अब जब लाख डाउन के बाद आमदनी सुनी हो गई और पैसा खत्म होने लगा तो फिर जुगाड़ गाड़ी से ही वह अपने वतन के लिए वापस होने हो गए 4 दिन से अपने घर के लिए सफर कर रहे हैं और अभी 1 दिन का सफर बाकी है 4000 से ज्यादा जुगाड़ गाड़ी में तेल का खर्च हो चुका है ऐसे में निराश जरूर हैं पर हिम्मत नहीं हारी और अपने घर की तरफ निकल कर के लगातार चल रहे हैं