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27 वर्षों से नायब तहसीलदार के पद तैनात था लेखपाल

अयोध्या के नायब तहसील पर कार्यरत लेखपाल के रिटायर्ड के कुछ पहले हुआ बड़ा खुलासा

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27 वर्षों से नायब तहसीलदार के पद तैनात था लेखपाल

27 वर्षों से नायब तहसीलदार के पद तैनात था लेखपाल

अयोध्या : सरकारी महकमे से जुड़ी बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक सर्वे लेखपाल बीते 27 वर्षों से सर्वे नायब तहसीलदार के पद पर तैनात रहा और किसी को कोई खबर नहीं हुई. 27 वर्षों तक पद का लाभ लेने के बाद मामले का खुलासा तब हुआ जब सर्वे नायब तहसीलदार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रोजेक्ट अयोध्या में भगवान राम की विशालकाय प्रतिमा स्थापना में लापरवाही दिखाई, जिसके बाद पूरे मामले की हकीकत सामने आई.

अयोध्या में स्थानापन्न सर्वे नायब तहसीलदार के पद पर तैनात रहे मोहम्मद सफी उल्लाह का है. मोहम्मद सफी उल्लाह की सरकारी सेवक के रूप में तैनाती सर्वे लेखपाल के पद पर हुई थी. बाद में मुख्यमंत्री योगी के गृह जनपद गोरखपुर में तैनाती के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से नियम कायदों को दरकिनार कर स्थाई व्यवस्था के तहत इनको सर्वे कानूनगो के पद पर प्रोन्नति दे दी गई और पदभार भी सौंप दिया गया.

मोहम्मद सफी उल्लाह को गोरखपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने 28 मई 1993 के आदेश से स्थानीय व्यवस्था में स्थानापन्न सर्वे कानूनगो के पद पर प्रोन्नत कर पदभार सौंप दिया. इसी प्रोन्नति को आधार बनाकर उसने वर्ष 1997 में स्थानापन्न सर्वे नायब तहसीलदार के पद पर प्रमोशन हासिल कर लिया. आदेश में लिखा कि यह नियुक्ति पूर्णतः अल्पकालिक है और बिना पूर्व सूचना के निरस्त की जा सकती है. बावजूद इसके वर्ष 1997 में बिना नियमित सर्वे कानूनगो नियुक्त हुए सफी उल्लाह को वर्ष 1997 में स्थानापन्न सर्वे नायब तहसीलदार के पद पर प्रोन्नत कर दिया गया. जबकि उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अस्थाई एवं स्थानापन्न नियुक्तियों के संबंध में उपबंधों का विखंडन) नियमावली 1991 के तहत 8 नवंबर 1991 से ही किसी को अस्थाई, स्थानापन्न, प्रोन्नतियां व नियुक्तियां करने का अधिकार नहीं था.

पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में विशाल भगवान श्री राम की प्रतिमा लगाने की योजना की घोषणा की. जिसके बाद सर्वे नायब तहसीलदार के रूप में सफी उल्लाह ने अपने अधिकार क्षेत्र के मीरापुर द्वाबा और आसपास की जमीनों का ब्यौरा जिला प्रशासन को दिया. लेकिन इस ब्यौरे को लेकर कई सवाल और विवाद खड़े हो गए और इसी के साथ ही मोहम्मद सफी उल्लाह की नियुक्ति को लेकर शिकायत हुई. जिसके बाद मोहम्मद सफी उल्लाह के कार्यकाल की पत्रावली तलाश कराई तो पेंडिंग जांच सामने आ गई.

इस मामले में जब जिलाधिकारी ने कार्रवाई की तो सर्वे नायब तहसीलदार रहे मोहम्मद सफी उल्लाह ने उच्च न्यायालय की शरण ले ली. हाई कोर्ट ने बिना नोटिस और पक्ष सुने एकतरफा कार्रवाई का हवाला देकर आदेश को निरस्त कर दिया. इसके बाद जिलाधिकारी ने 24 अगस्त को नोटिस जारी कर 7 बिंदुओं पर एक सप्ताह में जवाब मांगा.

अपने जवाब में सफी उल्लाह ने विभाग में तमाम पदों के खाली होने, इन पदों पर बरसों से नियमित नियुक्तियां न होने और कई अन्य लोगों की ओर से भी स्थानापन्न पदों का पदभार वहन किए जाने का हवाला दिया. इतना ही नहीं सफी उल्लाह ने एक साल से भी कम समय 30 जुलाई 2021 को सेवानिवृत्त आयु पूरी होने का हवाला देकर कार्रवाई न करने का अनुरोध किया. लेकिन जिलाधिकारी उनके इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुए और उनके ऊपर कार्रवाई की गाज गिरी.
इस पूरे मामले पर अधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि प्रोन्नति उत्तर प्रदेश लोक सेवा नियमावली 1991 को दरकिनार कर की गई. यह पूरी तरह से आविधिक और निष्प्रभावी है. मोहम्मद सफी उल्लाह को अपने मूल पद सर्वे लेखपाल के पद पर प्रभार ग्रहण करने का आदेश जारी किया गया है. बता दें कि मोहम्मद सफी उल्लाह का एक साल बाद रिटायरमेंट था, लेकिन उससे पहले ही उनका डिमोशन हो गया.

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