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106 खंभों और पांच प्रवेश द्वार वाला दो मंजिला होगा राम मंदिर, गर्भगृह में विराजमान होंगे प्रभुराम

दशकों पुराने राम जन्मभूमि विवाद (Ram Janambhoomi and Babri Masjid Dispute) पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से अब राम मंदिर निर्माण को लेकर कवायद शुरू हो गई है।

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106 खंभों और पांच प्रवेश द्वार वाला दो मंजिला होगा राम मंदिर, गर्भगृह में विराजमान होंगे प्रभुराम

106 खंभों और पांच प्रवेश द्वार वाला दो मंजिला होगा राम मंदिर, गर्भगृह में विराजमान होंगे प्रभुराम

अयोध्या. अयोध्या मामले (Ayodhya Verdict) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर बनने की तैयारियां शुरु कर दी गई हैं। वहीं केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राम मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाने में जुट गई है। अयोध्या मंदिर को लेकर मशहूर आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा के मुताबिक यह मंदिर दुनिया के सबसे भव्य मंदिरों में से एक होगा। इतना ही नहीं यह दुनिया का पहला मंदिर होगा जो दो मंजिला होगा। बता दें कि आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने करीब 30 साल पहले राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) का मॉडल देश के सामने पेश किया था। चंद्रकांत भाई सोमपुरा द्वारा तैयार राम मंदिर का मॉडल अयोध्या के कार्यसेवकपुरम में रखा गया है। इसी मॉडल के अनुरूप ही प्रस्तावित राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। चंद्रकांत भाई के अनुसार अयोध्या में भव्य राम मंदिर 106 खंभे वाला दो मंजिला मंदिर होगा। इसके गर्भगृह में प्रभुराम विराजमान होंगे। जबकि ऊपरी मंजिल पर राम दरबार होगा। आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने कहा है कि मंदिर निर्माण में कम से कम तीन साल का समय लगेगा।

कैसा होगा मंदिर

राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) में नागर शैली की डिजाइन होगी। अहमदाबाद के चंद्रकांत भाई का संबंध एक ऐसे परिवार से है, जिन्हें पारंपरिक भारतीय नागर शैली के मंदिरों के डिजाइन बनाने में महारत हासिल है। गुजरात के विख्यात सोमनाथ मंदिर के आर्किटेक्ट उनके दादा प्रभाशंकर सोमपुरा थे। चंद्रकांत भाई के पिता भी देश के जाने माने आर्किटेक्ट रहे हैं। उन्होंने ही उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर के मरम्मत का कार्य किया था। चंद्रकांत भाई के परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी देश के प्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण में अपना योगदान दे रही है।

भारत में इन शैलियों में हुए मंदिर के निर्माण

भारत में नागर और द्रविड़ का प्रभाव पूरे देश की मंदिरों के निर्माण में देखा जा सकता है। नागर शैली जहां उत्तर भारत के मंदिर निर्माण में इस्तेमाल हुआ है, तो वहीं दक्षिण भारत में द्रविड़ शैली में मंदिरों का निर्माण किया गया। उपरोक्त दोनों ही मंदिर निर्माण शैलियों से जुड़े कारीगर और आर्किटेक्ट समुदायों ने अपनी संबंधित शैलियों का पीढ़ी दर पीढ़ी विकास किया। उत्तर भारत में सोमपुरा नागर शैली के मंदिरों के निर्माण और डिजाइन से जुडा हुआ है। अधिकांस सोमपुरा परिवार मंदिरों के निर्माण के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है।