
अफवाह फैली कि अशोक सिंहल को गोली मार दी गई है। इस सूचना के बाद कारसेवक उग्र हो गए। पुलिस का घेरा तोड़ दिया गया।
Ram Mandir Katha: हनुमान गढ़ी के पास रामजन्म भूमि से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर अशोक सिंहल को अचानक एक लाठी सिर में लगी। खून का फब्बारा फूट पड़ा। वह गिरे। लेकिन संभल गए। सिर को कसकर गमछे से बांधा गया। जल्दी से कुछ कारसेवक उनको श्रीराम अस्पताल लेकर गए। जहां पर तीन टांके लगे। अस्पताल को चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया था। जिस अशोक सिंहल को गिरफ्तार करने के लिए मुलायम सिंह यादव की पुलिस और खुफिया एजेंसियां खाक छान रही थी। वह मिल गए थे। अस्पताल से निकलते ही गिरफ्तार कर जेल पहुंचा देने का आदेश था। लेकिन यह क्या? सिर में तीन टांके लगे और वह गायब हो गए।
यह कहानी 30 अक्तूबर 1990 की है। इससे पहले की कहानियां आपने पत्रिका राम मंदिर कथा अभियान के 43 अध्यायों में पढ़ चुके हैं। अगर नहीं तो इस लिंक पर https://www.patrika.com/topic/ram-mandir/ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। आइए आपको फिर से राम मंदिर कथा के एक बेहद जरूरी दिन में ले चलते हैं…
अशोक सिंहल के गायब होने पर पुलिस हैरान हो गई किधर से निकले कहां गए। दूसरी तरफ अशोक सिंहल के घायल होने के बाद पुलिस अधिकारी महंत नृत्यगोपाल दास, परमहंस रामचंद्र दास के पैर छूकर उन्हें सत्याग्रह करने को कहा। श्रीशचंद्र दीक्षित को मनाने की कोशिशे होने लगी लेकिन कोई भी बिना कारसेवा पीछे हटने को तैयार नहीं था। इसके बाद गिरफ्तार कर लेने की योजना पर पुलिस ने काम शुरू किया।
अशोक सिंहल को गोली मार देने की फैली अफवाह
अशोक सिंहल को लाठी लगी। वह अस्पताल पहुंचे। लेकिन अफवाह फैली कि अशोक सिंहल को गोली मार दी गई है। इस सूचना के बाद कारसेवक उग्र हो गए। पुलिस का घेरा तोड़ दिया गया। घटनाक्रम को कवर कर रहे पत्रकार गोपाल शर्मा और अन्य मीडिया श्रोतों के मुताबिक हनुमान गढ़ी से राम जन्मभूमि जाने वाले रास्ते में पुलिस ने कारसेवकों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। वही पत्थर उठाकर कुछ साधुओं ने उल्टे पुलिस पर फेंककर जवाबी कार्रवाई कर दिया।
लेकिन प्रत्यक्ष दर्शी आशुतोष श्रीवास्तव कहते हैं कि अब तक कारसेवक हिंसक नहीं हुए थे। उन्हें हिंसा के लिए उकसाया जा रहा था। ताकि शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाकर दमन करना आसान हो जाए। जय श्रीराम के नारे लगाते कारसेवक राम जन्मभूमि की तरफ दौड़ने लगे।
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साधु ने पुलिस की बस अगवा किया
अफरा-तफरी, पत्थरबाजी, जयश्रीराम के नारे और जन्मभूमि की तरफ दौड़ते कारसेवक। इसी बीच हनुमान गढ़ी से कुछ साधु बाहर निकले और पास में खड़ी पुलिस की बस मेंं चढ़ गए। एक साधु ने ड्राईवर की सीट सम्हाल लिया। फौरन कुछ कारसेवक दौड़कर बस में चढ़ गए। जिसे जिधर से रास्ता मिला बस में घुस गया। बोल बजरंगी बोलकर साधु ने बस को पूरी स्पीड से राम जन्मभूमि की तरफ दौड़ा दिया। बड़ा स्थान, कनक भवन, यज्ञशाला के सामने लगी पुलिस की तमाम बैरियर और मोर्चेबंदी को तोड़ते बस सीधे राम जन्मभूमि के पास रुकी।
30 अक्तूबर को दिन के करीब 11.45 बज रहे थे। पुलिस की मोर्चेबंदी ध्वस्त हो चुकी थी। इसी के साथ मुलायम सरकार का दंभ परिंदा पर नहीं मार सकता चकनाचूर हो चुका था। जन्मभूमि के पास तैनात दर्जन भर आईपीएस अधिकारी एक दूसरे का मुंह ताक रहे थे। जवान हट गए। परिंदों (कारसेवकों) ने जन्मभूमि के गलियारे का आखिरी सींखचा खोल दिया और दर्शन को बेताब थे।
ठीक उसी के उपर बना बाबरी ढांचे का गुंंबद कारसेवकों को चुनौती दे रहा था। पीछे से नारा लगा। जोश बढ़ा। लोहे की रेलिंगों, लोहे के कंटीले तारों और सशस्त्र बलों के अभेद्य दुर्ग को ध्वस्त करते कारसेवक अंदर घुस गए। गर्भगृह के सामने के मुख्य द्वार पर सींखचों में लगा ताला सुरक्षा बलों ने खोल दिया। पीछे की ओर से घुसे कारसेवक बाई ओर के टीले से एक पेड़ का सहारा लेकर बाबरी ढांचे के गुंबद पर चढ़ने लगे।
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सरयू पुल पर चली गोली
सरयू पुल के उस तरफ जमे हजारों कारसेवकों के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने हल्ला बोल दिया। अयोध्या आने के लिए पुल पर चढ़ आए। लाठियां चली, आंसू गैस के गोले दागे गए। भीड़ का जोश घटने की जगह बढ़ता जा रहा था। केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के 61वीं बटालियन के कमाडेंट, उपअधीक्षक और 90वीं बटालियन के उपअधीक्षक ने जवानों से एसएलआर सेमी ऑटोमेटिक बंदूक छीनकर कारसेवकों पर तान दिया। कहा आगेे बढ़े तो मार दिए जाओगे। लेकिन कारसेवकों ने भी गर्जना किया हम राम के लिए मरने ही आए हैं। चला गोली।
बीस-बीस राउंड गोलियां चली। अनेक कारसेवक मौके पर ही मारे गए। मातम पसरा लेकिन जो बच गए, वे पीछे नहीं हटे। दो जवानों ने तो अपने अधिकारियों पर ही बंदूक तान दिया। सरयू पुल पर कितने कारसेवक मारे गए इसका आंकड़ा आज भी मौजूद नहीं है। अनेक शवों को पुलिस उठा ले गई। अनेक शव सरयू में फेंक दिए गए।
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गुंबद पर केसरिया लहराया
तीन-चार सौ कारसेवक बाबरी ढांचे में स्थित रामलला के गर्भगृह में पहुंच चुके थे। कुछ कारसेवक गुंबद पर चढ़ चुके थे। कुछ गुंबद पर चढ़ने की जद्दोजहद में थे। गर्भगृह के सामने के दरवाजे के बीच खड़ी दीवार क्षतिग्रस्त कर दी गई। जिससे कारसेवक आसानी से आ सकें।
कई खिड़कियों को तोड़कर उनमें लगे लोहे निकाले जा चुके थे। शामियाना कनात गाड़ने के हथौड़े मौके पर ही मिल गए। कुछ कारसेवक गुंबदों पर चढ़े कारसेवकों की मदद करने लगे। उनको नीचे से पत्थर, ईंट पकड़ाने लगे। इसी बीच तीन कारसेवक अपने साथ लाए राम शिलाएं दौडक़र शिलान्यास स्थल के गड्ढे में गाड़ दिया।
मुख्य गुंंबद के पर बने कमल आकार की नक्काशी जो चार छह इंच बाहर निकला था, उसे कारसेवक तोडऩे लगे। तीनों गुंबदों पर करीब सौ से डेढ़ सौ टुकड़े तोड़ डाले गए। गुंबदों पर भगवा झंडा लहरा उठा।
30 अक्तूबर 1990 को जब कारसेवक गुंबद पर थे, तभी आसमान में वायुसेना का हेलिकाप्टर मंडराया। फिर क्या? नीचे खड़े एक पुलिसकर्मी ने गोली चलाई। ...और पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दिया। गुंबद पर चढ़े रामबहादुर सिंह को तीन गोली लगी। वह फैजाबाद जिला अस्पताल पहुंचे।
आसमानी आदेश मिल चुका था। जगह-जगह गोलियां चलने लगी। हनुमान गढ़ी के रास्ते में पचास हजार कारसेवक रामधुन गाते सत्याग्रह करते आगे बढ़ना चाहते थे। हनुमान गढ़ी की गली में सर्वाधिक राउंड फायरिंग हुई। दिन के एक बज चुका था। पुलिस की गोली से शरद कोठारी मारे गए। भाई को गोली लगते देख, छोटा भाई आकर भाई के ऊपर लेट गया। उसे भी गोली मार दी गई। दोनों भाई मौके पर ही शहीद हो गए। पुलिस की गोली से अयोध्या के वासुदेव गुप्त, विनोद कुमार गुप्त, गोंडा के रमेश मिश्र मारे जा चुके थे। जारी रहेगा...
कल की राममंदिर कथा में हम आपको बताएंगे। जवानों ने कब गोली चलाने से इंकार किया। बंदर बाबरी ढांचे के गुंबद पर चढक़र क्या करने लगा...और आसमान में लहराते हेलिकाप्टर का क्या रहस्य था। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे अशोक सिंघल के सिर से खून निकला और उसके बाद गुस्साए कारसेवकों ने क्या किया।
Updated on:
02 Nov 2023 07:28 am
Published on:
02 Nov 2023 07:19 am
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