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मुलायम के करीबी पूर्व सांसद नंद किशोर यादव को अखिलेश ने बनाया आयोग का चेयरमैन

टिकट बंटवारे की लड़ाई के बीच अखिलेश के फैसले ने सबको किया हैरान। काफी समय से सपा में अलग-थलग पड़े थे नन्द किशोर।

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Mohd Rafatuddin Faridi

Dec 30, 2016

Nand Kishor Yadav

Nand Kishor Yadav

आजमगढ़. समाजवादी पार्टी टूट सकती है, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। शायद यही वजह है कि शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव अपनी चाल चल रहे हैं और सीएम अखिलेश यादव अलग पैंतरे बदलकर ज्यादा से ज्यादा सपाइयों को अपने खेमे में करने की कोशिश में जी जान से जुटे हैं। अखिलेश यादव शिवपाल सिंह यादव के लोगों को किस तरह से तोड़ रहे हैं यह तो उनकी ओर से जारी 235 प्रत्याशियों की लिस्ट से साफ समझ में आ गया, पर अब वह पिता मुलायम के करीबी रहे सपा की नींव कहे जाने वालों को भी अपने पाले में करने के मिशन पर लग गए हैं।




अपने इसी मिशन के तहत सीएम अखिलेश यादव ने इस क्रम में आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव के करीबी कहे जाने वाले सपा नेता व पूर्व राज्य सभा सदस्य नन्दकिशोर यादव को टिकट बंटवारे की लड़ाई के बीच अचानक मलाईदार कुर्सी देकर सबको हैरान कर दिया। उन्होंने नन्दकिशोर यादव को उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद आयोग का चेयरमैन बना दिया। हालांकि वह इस कुर्सी पर शायद महीने भर ही टिक पाएं। पर अचानक सपा की इस जंग के बीच अखिलेश यादव की यह चाल मुलायम और शिवपाल खेमे का चिंता करने का बड़ा कारण दे दिया है।




कहा जाता है कि नन्द किशोर यादव की आजमगढ़ में पकड़ ठीक ठाक है। इसके अलावा क्षत्रिय लॉबी का भी उन्हें काफी हद तक साथ मिला हुआ है। बता दें कि नन्दकिशोर यादव सपा के संस्थाक सदस्यों में से एक और मुलायम के बेहद खास कहे जाने वाले स्व. ईशदत्त यादव के पुत्र हैं। वह भी सपा से राज्यसभा सदस्य थे। उनके निधन के बाद मुलायम सिंह यादव ने नन्दकिशोर यादव को राज्य सभा भेज दिया था। कहा यह जा रहा है कि अब नन्दकिशोर यादव शिवपाल से ज्यादा लगाव न होने के चलते अखिलेश खेमे के हो गए हैं।




कुल मिलाकर देखा जाय तो आजमगढ़ जिसे सपा का गढ़ कहा जाता है, वहां सपा की जंग कुछ अलग ही है। सपा तीन खेमों में बंटी हुई है। टिकट बंटवारे में मुलायम और अखिलेश दोनों ने वहां के वर्तमान विधायकों को अपने पाले में करने के लिये उन्हें टिकट दे दिया है। महज मेंहनगर विधायक बृजलाल सोनकर जो अखिलेश के करीबी कहे जाते हैं उनका टिकट मुलायम ने काट दिया है। अब देखना यह होगा कि आजमगढ़ के सपा नेता किस खेमे में जाते हैं। उससे भी दिलचस्प यह कि वहां के समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता किसे अपना नेता मानते हैं। इस पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि सपा में जंग के तरीके और हथियार जिस तेजी से बदलते हैं उसमें हर पल सुलह की गुंजाइश भी बची रहती है और आर या पार की लड़ाई की संभावना भी।

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