बेसिक शिक्षा के बाद अब राजकीय माध्यमिक विद्यालयों पर भी विलय का संकट मंडराने लगा है। शासन ने ऐसे राजकीय विद्यालयों को चिन्हित करने का निर्देश दिया है, जिनमें छात्र संख्या शून्य से 100 के बीच है। जिले में तीन हाईस्कूलों में 50 से कम और तीन इंटर कॉलेजों में 100 से कम छात्र नामांकित हैं, जिससे इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
UP school news: बेसिक शिक्षा के बाद अब राजकीय माध्यमिक विद्यालयों पर भी विलय का संकट मंडराने लगा है। शासन ने ऐसे राजकीय विद्यालयों को चिन्हित करने का निर्देश दिया है, जिनमें छात्र संख्या शून्य से 100 के बीच है। जिले में तीन हाईस्कूलों में 50 से कम और तीन इंटर कॉलेजों में 100 से कम छात्र नामांकित हैं, जिससे इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले जिले में 50 से कम नामांकन वाले 184 परिषदीय विद्यालयों को बंद कर उनके शिक्षकों और छात्रों का समायोजन अन्य विद्यालयों में कर दिया गया था। अब इसी तर्ज पर माध्यमिक विद्यालयों के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
जिले में कुल 26 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें से फिलहाल 24 संचालित हो रहे हैं। शासन ने अब निर्देश जारी कर ऐसे विद्यालयों की सूची मांगी है, जहां हाईस्कूल स्तर पर 50 से कम और इंटरमीडिएट स्तर पर 100 से कम छात्र पढ़ रहे हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऐसे छह विद्यालय चिन्हित किए गए हैं — जिनमें तीन हाईस्कूल और तीन इंटर कॉलेज शामिल हैं। इनकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है।
विलय की संभावनाओं के बीच इन विद्यालयों के शिक्षकों में असमंजस और चिंता का माहौल है। शिक्षक यह जानना चाहते हैं कि यदि विद्यालयों का विलय होता है, तो उनका स्थानांतरण किस विद्यालय में किया जाएगा और इससे उनकी सेवाओं पर क्या असर पड़ेगा। अब सभी की नजरें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।