बेमौसम बरसात, ओले और आंधी से मिनी मलिहाबाद बर्बाद, बारिश की संभावना से डरे लोग

दलहनी, तिलहनी के साथ ही गेंहू की फसल बर्बाद
मिनी मलीहाबाद में आम की फसलों को भारी नुकसान
पोल गिरने व तार टूटने से कई क्षेत्रों की बिजली गुल
आगे भी बारिश की संभावना से सहमे लोग

By: Mahendra Pratap

Updated: 13 Mar 2020, 04:30 PM IST

आजमगढ़. बेमौसम बरसात व चक्रवाती तूफान के साथ ओलावृष्टि ने पूरे जिले में कहर बरपा रखा है। तिलहनी व दलहनी फसलों के साथ ही गेहूं और जौ की फसल ने जमीन पकड़ लिया है। यहीं नहीं आम की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मिनी मलिहाबाद के नाम से प्रसिद्ध निजामाबाद में तबाही देख आम कारोबारियों ने माथा पीट लिया है। आगे भी बारिश की संभावना को देखते हुए लोग सहमें हुए है। अगर मौसम साफ नहीं हुआ तो किसानों को और भी नुकसान का सामना करना पडे़गा।

गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों जमीन पर गिरी :- जिले में पिछले दो दिनों से चक्रवाती तूफान और बारिश हो रही है। कई स्थानों पर ओले भी पड़े है। चूंकि रबी की फसलें गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों में बालिया लग चुकी है इसलिए ओलावृष्टि से पौधे के साथ ही फल टूट कर गिर रहे हैं। फिर उसके बाद तेज हवा से पौधे जमीन में गिर जा रहे हैं। इससे फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। तूफान ने बिजली व्यवस्था को भी ध्वस्त कर दिया है। अब भी बादल छाये हुए है और अगले दो दिन बारिश की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे लोग सहमें हुए है।

आम का उत्पादन होगा कम :- मिनी मलिहाबाद के नाम से प्रसिद्ध निजामाबाद तहसील क्षेत्र के परसहां, नेवादा, बड़हरिया, बनगांव, सिहींपुर, मिर्जापुर, मोहनाट, शाहपुर, मुइयां सहित तीन दर्जन से अधिक गांवों में किसान आम की खेती करते हैं। यहां हजारों हेक्टेयर क्षेत्रफल में आग के बागिचे लगाए गए हैं। इस क्षेत्र में दशहरी, लाल मालदा, लंगड़ा, सफेदा, चौसा, मिठुआ, समरबहीत आदि प्रजाति के आमों की खेती की जाती है। सबसे अधिक उत्पादन दशहरी आमों का होता है। इसके कारण इस क्षेत्र को मिनी मलिहाबाद के नाम से जाना जाता है। किसान सीधे फसल का निर्यात करते हैं। चक्रवाती तूफान का सीधा असर आम की फसल पर पड़ा है। आम के बौर तूफान में गिर रहे है। इससे आम का उत्पादन भी कम होना तय है। इससे कारोबारी सहमे हुए है।

लागत भी निकलना मुश्किल :- आम की खेती करने वाले बड़ेगांव के हारून शेख, वीरेंद्र मिश्र, दिनेश चंद्र मिश्र, फरिहां के छोटुकू, शाह आलम, बरखू, बड़हरिया के लाडिल शेख, मोहनाट के त्रिलोकी पांडेय, मुइया के चंद्रभान तिवारी, परसहां के हरिमंदिर पांडेय, छेदी सोनकर आदि का कहना है कि इस बार फसल काफी अच्छी लग रही थी लेकिन फल लगने से पहले ही ओलावृष्टि और तूफान ने भारी नुकसान पहुंचाया है। यही हाल रहा तो लागत भी निकलना मुश्किल होगा।

बेमौसम बरसात-ओलावृष्टि से भारी नुकसान :- कृषि वैज्ञानिक डा. आरके सिंह व डा. रूद्र प्रताप सिंह का कहना है कि इस बार रबी की फसल काफी अच्छी थी और बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी लेकिन बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। अब से भी धूप हो जाय तो क्षति को कुछ प्रतिशत कम किया जा सकता है लेकिन मौसम का रूख देख यह नहीं लगता कि अगले एक दो दिन यह साफ होगा। अगर ऐसा ही मौसम बना रहा तो किसानों को भारी क्षति का सामना करना पड़ेगा।

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