
पुस्तक खरीद घोटालें की जांच के लिए आयुक्त से मिले भाजपाई
आजमगढ़. बेसिक शिक्षा विभाग में पुस्तकों के ख़रीद फरोक्त व कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में की गयी अनियमितता की जांच की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा। समिति का गठन कर मामले की जांच कराने व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालयों में सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी शशि कुमार के संरक्षण में बायोमेट्रिक मशीनों व कैमरा का खरीद मार्केट रेट से ज्यादा पर की गई। आज सारी बायोमेट्रिक मशीने व कैमरे खराब हो चुके है। बालिकाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है तथा सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
कुछ दिन पूर्व समाजिक संगठन द्वारा भ्रस्टाचार को उजागर करने के लिए जूनियर हाईस्कूल जाफरपुर में किताबों से भरे पड़े जिन कमरों को उपजिलाधिकारी सदर द्वारा जाँच हेतु सील कराया गया है उसे सभी शिकायतकर्ताओ व मीडिया बंधुओ के सामने ही गिनती व जाँच कराई जाए जिससे कि विभिन्न समाचार पत्रों में आरहे भ्रामक आकड़ो की स्थिति स्पष्ट हो सके।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी आज़मगढ़ ने बिना कमरों की सील खुलवाए व बिना जांच रिपोर्ट के ही बेसिक शिक्षा अधिकारी को क्लीन चिट दे दिया। जांच भी सीडीओ से कराने की बात कही, यह सरकार के द्वारा जीरो टॉलरेंस की अनदेखी है। सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी शशि कुमार जब से आज़मगढ़ में पदभार ग्रहण किये है तब से शिक्षा विभाग में रोज भांति-भांति के घोटाले प्रकाश में आते रह-रहे है। आखिर उच्चाधिकारियों की ऐसी कौन सी मजबूरी है कि तमाम शिकायतां व विरोध प्रदर्शनों के बावजूद इन्हें निलंबित करने की बजाय एनआरएचएम व राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के लेखाधिकारी का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया है?
आज़मगढ़ के कुछ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पिछले कई वर्षों से आठ से साढ़े आठ लाख रुपये ही प्रति विद्यालय खर्च किये जाते थे लेकिन सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी के कुछ महीने के कार्यकाल में ही यह खर्चा प्रति विद्यालय पंद्रह से सोलह लाख पहुँच गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सील हुए कमरों में किताबों का कुछ और आंकड़ा बताया जबकि कमरा सील कराने वाले जांच अधिकारी उपजिलाधिकारी सदर दूसरा आंकड़ा देते हुए अभिलेखों में साफ हेराफेरी बता रहें है। सबकुछ सिर्फ अनुमान पर ही बताया जा रहा है।
इसमें साफ है कि कई उच्चाधिकारियों की मिली भगत है। बीएसए कहते हैं कि शिक्षक दिसंबर 2017 से अभिलेख लेकर गायब है तो मार्च में करोड़ो रूपये का भुगतान किस आधार पर हुआ? व मई में नई पुस्तको के क्रय का आदेश किस आधार पर किया गया? पिछले वर्ष की पुस्तको की ढुलाई का भुगतान किस आधार पर हुए?। क्या स्टॉक रजिस्टर से मिलान कराया गया? या बिना देखे ही उच्चाधिकारियों सहित, बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी ने हस्ताक्षर कर दिए।
इसमें सभी की मिलीभगत लगती हैं। अपने को फंसता देख ऐसा तो नही की सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी ने अभिलेख गायब कर दिया है। क्योंकि शिक्षक को तो दिसंबर में ही कार्यालय से रिलीव कर दिया गया था।
भाजयुमो जिलाध्यक्ष ने मांग किया कि तत्काल प्रभाव से बेसिक शिक्षा अधिकारी व सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को निलंबित किया जाए जिससे कि वो लोग जांच प्रभावित न कर सकें। उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाकर निष्पक्ष रूप से जाँच करायी जाए ताकि अनियमितता उजागर हो सके। ज्ञापन देने वालों में अजय यादव एडवोकेट, कुशल सिंह गौतम, अनुभव सिंह, अतुल सिंह, अमन श्रीवास्तव, आयुष अग्रवाल, अंकित राय, धर्मवीर चौहान आदि शामिल थे।
By- रणविजय सिंह
Published on:
10 Aug 2018 08:49 pm
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