
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. जिला पंचायत चुनाव में भाजपा की बुरी हार के लिए खुद उसके अपने जिम्मेंदार हैं। कहने के लिए बीजेपी का पूरा संगठन प्रत्याशी को जिताने में लगा था लेकिन मतदान हुआ तो बीजेपी के सदस्य भी सपा के साथ खड़े हो गए। यहीं नहीं बसपा और निर्दल सदस्यों ने भी खुलकर सपा का साथ दिया जिसके कारण सपा बड़ी जीत हासिल करने में सफल रही। आजमगढ़ बीजेपी की जमानत जब्त होना सरकार और संगठन की बड़ी नाकामी के तौर पर देखा जा रहा है।
बता दें कि भाजपा ने चुनाव से एक माह पहले ही प्रत्याशी की घोषणा कर दी थी। संजय निषाद को प्रत्याशी बनाया गया तो पार्टी को उम्मीद थी कि अपने 11 सदस्यों के साथ ही अति पिछड़े सदस्यों को साधने में सफल होगी। सपा के 25 सदस्य जरूर जीते थे लेकिन पार्टी ने उम्मीदवार घोषित करने में काफी विलंब किया। यही वजह थी कि लोग कांटे की टक्कर की उम्मीद कर रहे थे।
यहीं नहीं चुनाव की घोषणा के पहले ही बीजेपी ने सदस्यों का सम्मान समारोह आयोजित किया जिसमें 24 सदस्य शामिल हुए थे। इसके बाद लड़ाई बराबर की मानी जा रही थी लेकिन बीजेपी के लोग और प्रत्याशी अपने सदस्यों को भी साथ रखने में असफल रहे। बीजेपी के छह सदस्यों ने सपा को वोटिंग की। साथ ही जिन अन्य सदस्यों के समर्थन का दावा बीजेपी कर रही थी वे भी सपा के पाले में चले गए।
समाजवादी पार्टी बसपा के सदस्यों को भी साधने में सफल रही। राजनीति के जानकारों का कहना है कि सपा ने इस चुनाव में साबित कर दिया कि अभी आजमगढ़ में उसका और उसके संगठन का तोड़ किसी विरोधी दल के पास नहीं है। अगर ऐसा न होता तो सपा जिला पंचायत में लगातार तीसरी बार जीत हासिल नहीं करती।
BY Ran vijay singh
Published on:
03 Jul 2021 05:54 pm

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