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साइबर अपराधियों के चक्रव्यूह में फंसे लोग, थोड़ी सी सावधानी बचा सकती है इस जाल से

- साइबर अपराधियों की सर्वाधिक गिरफ्तारी करने वाले एसपी बोले- मथुरा जिले के बरसाना थाना क्षेत्र के हथिया गांव में सक्रिय हैं सौ से अधिक हैकर- एसपी का दावा, आजमगढ़ ही नहीं, पूरे यूपी में साइबर अपराधियों की कमर तोड़ने की हो चुकी है तैयारी

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Cyber crime

साइबर काप कहे जाने वाले आजमगढ़ पुलिस अधीक्षक प्रो. त्रिवेणी सिंह का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी लोगों को इनका शिकार होने से बचा सकती है

आजमगढ़. साइबर अपराध आज एक बड़ी चुनौती है। साइबर अपराधी इतने शातिर हैं कि अधिकारी भी आसानी से इनके जाल में फंस जा रहे हैं। आजमगढ़ जिला तो दूसरा जामतारा (झारखंड) बन चुका है। जिले के 15 पुलिस अधिकारी कर्मचारी फेसबुक हैकिंग के शिकार हो चुके हैं तो समाज कल्याण अधिकारी का फेसबुक हैक कर उनके मित्रों से हजारों रुपये की वसूली भी अपराधी कर चुके हैं। जामतारा की तरह ही फेसबुक हैंकिग का भी एक बड़ा गिरोह जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सक्रिय है। चूंकि आनलाइन फ्राड और हैकरों की सर्वाधिक गिरफ्तारी इस जिले में हुई है इसलिए पुलिस इनके काम करने के तरीकों को अच्छी तरह समझने में सफल है। साइबर काप कहे जाने वाले आजमगढ़ पुलिस अधीक्षक प्रो. त्रिवेणी सिंह का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी लोगों को इनका शिकार होने से बचा सकती है। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि आजमगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे यूपी में सक्रिय साइबर गिरोह की जड़ तक पहुंचने और उन्हें सलाखों तक पहुंचाने की तैयारी कर ली गयी है।

क्या है साइबर अपराध
पुलिस अधीक्षक के मुताबिक वे अपराध जिनमे कंप्यूटर को एक हथियार के रूप में उपयोग किया जाता है। इस प्रकार के अपराधों में साइबर आतंकवाद, आईपीआर उल्लंघन, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, ईएफटी धोखाधड़ी, पोर्नोग्राफी आदि शामिल हैं। यूपी में आम तौर पर साइबर अपराध से जुड़े अपराधी क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग, आन लाइन खरीदारी, सिम क्लोनिंग कर लोगों को लाखों का चूना लगा रहे हैं। इसके अलावा फेसबुक को हैक कर धन वसूली की जा रही है। यूपी के मथुरा जिले के बरसाना थाना क्षेत्र के हथिया गांव सौ से अधिक सइबर अपराधी सक्रिय हैं तो इसके तार राजस्थान से भी जुड़े हुए हैं। जो प्रदेश के विभिन्न जिलों के युवाओं को ट्रेड कर उनसे साइबर अपराध कराते हैं और फेक एकाउंट के जरिये रूपये ट्रांसफर कर लेते हैं।

साइबर अपराधी कैसे बनाते हैं लोगों का शिकार
आम तौर पर यह देखा जाता है कि लोग अपना मोबाइल नंबर, जन्मतिथि ही मेल अथवा फेसबुक का पासवर्ड के रूप में उपयोग करते हैं। यहां तक कि एटीएम का पिन कोड भी इसे बना देते हैं। चूंकि फेसबुक पर यूजर आइडी और जन्मदिन व मोबाइल नंबर शो करता है इसलिए अपराधी बड़े आसानी से फेसबुक को हैक कर लेते हैं। कुछ लोग यूजर नेम व पासवर्ड एक ही बना देते हैं। अपराधी इन्हें भी आसानी से ट्रेस कर उनके एकाउंट का दुरुपयोग करते हैं।

फेसबुक से कैसे हो रहा अपराध
साइबर अपराध से जुडे़ अपराधी पहले फेसबुक को हैक करते है फिर उस व्यक्ति के मित्रों से मैसेंजर पर बात करते है। उन्हें कोई मजबूरी बताकर पैसा मांगते हैं और फेक एकाउंट में ट्रांसफर कराते हैं। मैसेंजर पर बात करने वाले को लगता है कि उसका मित्र परेशान है तो वह आसानी से धन दे देता है। इसके अतिरिक्त इस अपराध से जुड़े लोग ओएलएक्स ऐप पर गाड़ी या अन्य सामान का ऐड डालकर अपने आप को सेना का अधिकारी बताकर कम कीमत पर कार व अन्य सामान बेचने के नाम पर धोखाधडी करके पेटीएम, गुगल पे एकाउंट में पैसा जमा कराते है। केवल आजमगढ़ में सैकड़ों लोग इनके शिकार हो चुके है। इसमें पुलिस के 15 अधिकारी कर्मचारी और समाज कल्याण अधिकारी तक शामिल हैं।

कैसे बचें साइबर अपराध से
पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, थोड़ी सी सावधानी लोगों को इन हैकरों और साइबर अपराधियों से बचा सकती है।
-अपना एटीएम कार्ड किसी दूसरे को न दें।
-एटीएम का पिन समय समय पर बदलते रहे।
-पैसा निकालने के बाद एटीएम से निकलने वाली पर्ची वहां न फेंके, उसे फाड़ दे अथवा साथ ले जाएं।
-फेसबुक का यूजर नेम पासवर्ड एक न रखे, पासवर्ड हमेशा कठिन बनाएं और समय समय पर बदलते रहें।
-यदि कोई फोन पर अधिकारी बनकर एटीएम की जानकारी मांगे तो बताने के बजाय शिकायत करें।
-एटीएम गुम होने की स्थिति में तत्काल उसे ब्लाक करायें।