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कभी हजारों की चलाता था रोजी रोटी, आज खुद के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा ताल सलोना

सगड़ी तहसील स्थित ताल सलोना कभी हजारों लोगों के लिए रोजगार का माध्यम था। लोगों के घरों के चुल्हे इस ताल के भरोसे जलते थे लेकिन यह ताल अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। कारण कि ताल पर भू-माफियाओं की नजर पड़ गयी है। ताल की भूमि पर कब्जा कर इसके अस्तित्व को ही मिटाने की कोशिश हो रही है।

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ताल सलोना

ताल सलोना

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. सगड़ी तहसील में स्थित 977 हेक्टेयर में फैले ताल सलोना से कभी हजारों परिवारों की रोजी रोटी चलती थी। कमलगट्टा और मछली का कारोबार कर लोग आसानी से रोजी रोटी का इंतजाम करते थे। लोग खुशहाल से लेकिन भू-माफियाओं की ताल पर ऐसी नजर पड़ी कि उन्होंने न केवल गरीबों से रोटी छीनी बल्कि ताल के अस्तित्व को भी खतरे में डाल दिया है। प्रशासन भी इनके खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम है। इससे ताल सलोना का अस्तित्व मिटता जा रहा है।

सगड़ी तहसील से मात्र तीन किमी पूरब में स्थित ताल सलोना जनपद ही नहीं प्रदेश में अपना गौरवशाली स्थान रखता है। लगभग 977 हेक्टेयर में फैला ताल दशकों पूर्व तक क्षेत्र की सुख, समृद्धि का साधन था। ताल के आसपास स्थित धनछुला, मसोना, काजी की डिगवनिया, इसरहा, भरौली, अजमतगढ़, ढेलुवा बसंतपुर, नरहन, सुखमदत्तनगर, भरौली, पारनकुंडा आदि कई दर्जन गांव के लोगों की रोजी-रोटी इसी ताल के जरिए चलती थी। ताल के किनारे लगभग एक हजार मल्लाहों का परिवार मछली पकड़कर जीविका चलाता है। ताल सलोना से निकलने वाला लाखों रुपये का कमलगट्टा, सिरसी, सुथनी और तिन्नी का चावल लोगों की समृद्धि का साधन था।

वर्षों पहले अजमतगढ़ स्टेट के लोग इसके सुंदरीकरण के लिए निजी तौर पर लाखों लाख रुपये खर्च करते थे। ताल सलोना के किनारे मां दुर्गा मंदिर, गणेश मंदिर, राधा-कृष्ण की मनोहारी प्रतिमा, ताल के बीचोबीच काली का मंदिर और कई जगहों पर स्नानागार और सीढ़ियां बनाकर सुंदर और रमणीय बनाया गया था। सलोना ताल में कभी पक्षियों का कलरव, हाथियों के झुंड की अठखेलियां, मछलियों का तैरना, विदेशी पक्षियों की मधुर आवाज क्षेत्र के लोगों को बरबस आकर्षित किया करती थी।

आज ताल की लगभग 100 एकड़ जमीन पर माफियाओं ने कब्जा कर लिया है। आसपास बसे लोगों को डर है कि ऐसे ही जमीन पर कब्जा होता गया तो ताल का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। हजारों लोगों की रोजी-रोटी और क्षेत्र के पर्यावरण को खतरा पैदा हो जाएगा। वहीं अधिकारी है कि शिकायत को संज्ञान नहीं ले रहे हैं। वैसे नायब तहसीलदार मयंक मिश्र का कहना है कि ताल सलोना पर किए गए अवैध कब्जों की जांच कराकर उसे खाली कराने की कार्रवाई चल रही है। एक राजस्वकर्मी ने अभिलेखों में सौ एकड़ भूमि दो लोगों के नाम चढ़ा दिया था, जिसे निरस्त करने की कार्यवाही चल रही है। जल्द ही ताल कब्जा मुक्त होगा।

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