
इस बार गरीब नहीं चख पाएगा फलों के राजा दशहरी का स्वाद, ऊंची कीमत वसूलने की तैयारी में कारोबारी
आजमगढ़. आम की कई प्रजातियां हैं लेकिन दशहरी आम को फलों का राजा कहा जाता है। हर कोई इसका स्वाद चखना चाहता है लेकिन शायद ही इस बार यह मौका मिले। आंधी तूफान ने आम की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। छोटे किसान तो अचार तक के लिए आम का उत्पादन करने में नाकाम दिख रहे हैं। थोड़ा बहुत जो आम बचा है वह भी मौसम के भरोसे है। अगर अब से मौसम ने साथ दिया तो शायद बची हुई 20 प्रतिशत फसल बाजार तक पहुंच जाए, लेकिन इसकी कीमत इतनी अधिक होगी कि गरीब को इसे देख कर ही संतोष करना पड़ेगा।
जिले में बड़े पैमाने पर आम की खेती
जिले में बड़े पैमाने पर आम की खेती होती है। निजामाबाद क्षेत्र को तो मिनी मलीहाबाद कहा जाता है। निजामाबाद तहसील क्षेत्र के परसहां, नेवादा, बड़हरिया, बनगांव, सिहींपुर, मिर्जापुर, मोहनाट, शाहपुर, मुइयां, संजरपुर, खोदादादपुर, असीलपुर, अहरौला ब्लाक के असिलाई, फुलवरिया, खजुरी सहित तीन दर्जन गांवों में आम की सर्वाधिक खेती होती है। छोटे किसान आम में बौर लगते ही बाग को बेच देते है। वहीं बड़े किसान खुद ही उत्पादन कर आम को मंडी तक पहुंचाते हैं। इस बार आम की फसल भी काफी अच्छी थी। किसानों को उम्मीद थी कि वे फसल बेचकर रबी के नुकसान की भरपाई कर लेंगे, लेकिन मौसम ने किसानों की आस तोड़ दी। फरवरी माह से ही लगातार आ रही आंधी और तूफान ने आम की फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया। थोड़ी बहुत जो फसल बची थी वह पिछलेे तीन दिनों से लगातार आ रहे तूफान में बर्बाद हो रही है।
आंधी-तूफान के चलते फसल बर्बाद
आम के फल में अभी जाली भी नहीं पड़ी है लेकिन तूफान में वह गिर जा रहे हैं, जिसके कारण उसकी बिक्री अचार के लिए भी नहीं हो पा रही। किसान की उम्मीद लगातार डूब रही है। मौसम का रूख देख किसान अब भी सहमें हुए हैं। आम की खेती करने वाले बड़ेगांव के हारून शेख, वीरेंद्र मिश्र, दिनेश चंद्र मिश्र, फरिहां के छोटुकू, शाह आलम, बरखू, बड़हरिया के लाडिल शेख, मोहनाट के त्रिलोकी पांडेय, मुइया के चंद्रभान तिवारी, परसहां के हरिमंदिर पांडेय, छेदी सोनकर, अहरौला के रामजीत सिंह, अनिल सिंह, उपेंद्र आदि का कहना है कि इस बार फसल काफी अच्छी थी। हमें उम्मीद थी कि रबी के फसल के नुकसान की भरपाई आम की फसल से हो जाएगी लेकिन फल लगने के साथ ही मौसम का कहर शुरू हुआ जो आज तक जारी है। अब तक 80 प्रतिशत फसल बर्बाद हो चुकी है। 20 प्रतिशत जो फसल बची है उसपर भी मौसम की तलवार लटक रही है। जो हालात है इस बार उस हिसाब से तो आम का बाजार तक पहुंचना मुश्किल ही है।
हुआ भारी नुकसान
कृषि वैज्ञानिक डा. आरके सिंह व डा. रूद्र प्रताप सिंह का कहना है कि इस बार आम की फसल काफी अच्छी थी लेकिन बेमौसम बरसात और तूफान ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। अभी मौसम का रूख ठीक नहीं है। अब अगर आंधी-तूफान आता है तो बची फसलें भी बर्बाद हो जाएंगी। वहीं अब से अगर मौसम ठीक हुआ तो किसान बची हुई फसल से कुछ आमदनी कर सकता है, लेकिन मौसम का रूख देख कुछ भी कह पाना मुश्किल ही है।
Updated on:
12 May 2020 02:18 pm
Published on:
12 May 2020 02:16 pm
बड़ी खबरें
View Allआजमगढ़
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
