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एक्सप्रेस-वे के बाद कृषि कानून को लेकर सपा-भाजपा आमने सामने, सपाई बोले अखिलेश से डर गई बीजेपी

केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापस लेने के फैसले पर अब श्रेय लेने की होड़ मच गयी है। सपा के विधायक से लेकर पूर्व मंत्री तक यह दावा कर रहे हैं कि अखिलेश यादव के डर से कानून वापस लेने का फैसला किया गया गया है। इससे एक बार फिर जिले की सियासत गरम होती दिख रही है।
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आजमगढ़

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Ranvijay Singh

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Updated: 20 Nov 2021, 3:05 PM IST

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. पिछले एक पखवारे से सपा और बीजेपी में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे निर्माण का श्रेय लेने की होड़ मची थी और अब केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापस लेने के फैसले के बाद सपा यह साबित करने में जुटी है कि अखिलेश यादव की विजय रथ यात्रा से डरकर सरकार ने यह फैसला किया है। इससे जिले की राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर बढ़ गयी है। वहीं बीजेपी इसे सपा की बौखलाहट करार दे रही है।

बता दें कि 16 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुल्लतानपुर में एक्सप्रसे-वे का लोकापर्ण किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले सपाइयों ने आजमगढ़ व मऊ में कई स्थानों पर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लोकापर्ण कर यह दावा किया था कि यह प्रोजेक्ट उनका है। इसके बाद 17 को विजय रथ से पूर्वांचल पहुंचे अखिलेश यादव ने भी गाजीपुर से आजमगढ़ तक यह दावा किया कि यह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे उनका है।

अब केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया है तो फिर इसका श्रेय लेने की होड़ मची है। बीजेपी इसे किसानों की राय पर लिया गया फैसला बता रही है। तो सपा का दावा है अखिलेश यादव की रथयात्रा के दौरान पूर्वांचल में मिले अपार जन समर्थन को देखते हुए बीजेपी सरकार ने डरकर यह फैसला लिया है।

मुलायम सिंह यादव की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे राम आसरे विश्वकर्मा ने कहा कि किसानों का अनवरत आंदोलन और यूपी में सपा मुखिया अखिलेश यादव की पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर रथयात्रा के दौरान ऐतिहासिक समर्थन देख सरकार डर गयी और कृषि कानून को वापस लेने का आश्वासन दिया है। मुझे भरोसा है कि सरकार इस काले कानून को वापस लेगी। सपा को मिल रहे अपार जनसमर्थन से सरकार घबराई हुई है। वहीं पूर्व विधायक नफीस अहमद ने कहा कि अखिलेश यादव को यूपी में मिल रहे अपार जनसमर्थन से सरकार डरी हुई है। इसलिए यह कानून वापस लेने का फैसला किया गया है।

वहीं बीजेपी सपाइयों के बयान को बौखलाहट बता रही है। बीजेपी सरकार एक संवेदनशील सरकार है। जन भावनाओं का आदर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून वापस लेने का फैसला किया है। यह किसानों की मांग को देखते हुए निर्णय लिया गया है। आगे भी करती रहेगी। मोदी के फैसले से साबित हो गया है कि हम किसानों की राय लेकर उनके लिए बेहतर करने का प्रयास करेंगे।

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